पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने राज्य में पहचान, सुरक्षा और बदलती जनसांख्यिकी को चुनाव का प्रमुख मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि यदि राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो लव जिहाद और लैंड जिहाद जैसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस रुख के कारण उनकी पार्टी पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगता है, तो उन्हें इसकी परवाह नहीं है।

मीडिया से बातचीत में भट्टाचार्य ने कहा कि यह चुनाव केवल भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच की राजनीतिक लड़ाई नहीं है। उनके अनुसार, यह बंगाली हिंदुओं और राष्ट्रवादी सोच रखने वाले मुसलमानों के भविष्य से जुड़ा अहम मुकाबला है। उन्होंने दावा किया कि सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या का संतुलन तेजी से बदल रहा है और तृणमूल कांग्रेस की कथित तुष्टीकरण की राजनीति ने हालात को और जटिल बना दिया है।

भट्टाचार्य ने बांग्लादेश के मौजूदा हालात का जिक्र करते हुए सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी उठाईं। उनका कहना था कि वहां कट्टरपंथी तत्वों के कारण हिंदुओं को निशाना बनाया गया और महिलाओं के जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएं सामने आईं। उन्होंने दावा किया कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो पश्चिम बंगाल को भी ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार दोबारा सत्ता में आती है, तो यह राज्य के भविष्य के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

लव जिहाद पर अपनी बात रखते हुए भाजपा नेता ने कहा कि कुछ मामलों में लोग झूठी पहचान अपनाकर हिंदू नाम से लड़कियों से संबंध बनाते हैं और बाद में अपनी असली पहचान सामने लाते हैं। इसके अलावा उन्होंने लैंड जिहाद का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि अवैध घुसपैठिए आदिवासी महिलाओं से शादी कर जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। उनके अनुसार, मुर्शिदाबाद को आधार बनाकर ऐसे लोग झारखंड और बिहार के जंगल क्षेत्रों तक पहुंच चुके हैं।

अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भट्टाचार्य ने निर्वाचन आयोग के मतदाता सूची संशोधन अभियान (एसआईआर) का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत या हार से ज्यादा महत्वपूर्ण देश का हित है। उनके मुताबिक इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है। भट्टाचार्य ने कहा कि यह संघर्ष किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि कट्टरपंथ के विरुद्ध लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए है।