नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की उपस्थिति में दोनों देशों के बीच कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया गया। इससे पहले दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की विस्तृत वार्ता हुई, जिसमें व्यापार, प्रौद्योगिकी और सतत विकास जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
रायसीना डायलॉग 2026 को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन सहित पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और संवाद तथा कूटनीति ही आगे बढ़ने का रास्ता है। अमेरिका-इजरायल-ईरान और यूक्रेन से जुड़े संघर्षों का जल्द अंत होना वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
संयुक्त प्रेस वक्तव्य में प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास दोनों देशों की साझा प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष भारत और फिनलैंड मिलकर ‘वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम’ की मेजबानी करेंगे, जिससे हरित विकास और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
पीएम मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत और फिनलैंड कानून के शासन, बहुपक्षीय सहयोग और शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार समय की मांग है और आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ सख्त रुख अपनाना दोनों देशों की प्रतिबद्धता है।
राष्ट्रपति स्टब की भारत यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि रायसीना डायलॉग में उनकी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूदगी सम्मान की बात है।
व्यापारिक संबंधों पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से भारत और फिनलैंड के बीच निवेश और तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिलेगी। डिजिटल टेक्नोलॉजी, बुनियादी ढांचा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में दोनों देश अहम साझेदार हैं। नोकिया जैसी फिनलैंड की कंपनियों ने भारत में दूरसंचार क्षेत्र को मजबूत किया है, जबकि चिनाब नदी पर बने विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुल के निर्माण में फिनलैंड के विशेषज्ञों का सहयोग उल्लेखनीय रहा है।