नई दिल्ली में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की ओर से पटरियों के किनारे सुरक्षा बढ़ाने के लिए की गई नई तैनाती और निगरानी व्यवस्था का असर अब दिखने लगा है। अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं में पहले की तुलना में कमी दर्ज की गई है और कार्रवाई में तेजी आई है।
सीनियर डिविजनल सिक्योरिटी कमिश्नर आशुतोष पांडे ने बताया कि संवेदनशील रेल सेक्शनों पर निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल दो ड्रोन लगातार ऐसे क्षेत्रों पर नजर रख रहे हैं, जहां से पहले पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आती रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस तकनीकी निगरानी और फील्ड तैनाती का असर यह हुआ है कि ऐसे मामलों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी में लगभग 146 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
2026 में मई तक 144 घटनाएं दर्ज
RPF के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में मई तक पत्थरबाजी की 176 घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें 144 मामलों में कार्रवाई दर्ज की गई और 32 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं 2026 में इसी अवधि में घटनाएं घटकर 144 रह गईं। इस दौरान 138 मामले दर्ज हुए और 79 गिरफ्तारियां की गईं।
आदर्श नगर-नरेला-पानीपत सेक्शन सबसे संवेदनशील
अधिकारियों ने बताया कि आदर्श नगर-नरेला-पानीपत रेल सेक्शन को सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल किया गया है। इस रूट से ट्रेन गुजरने के दौरान ड्रोन के जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाती है। जैसे ही किसी संदिग्ध गतिविधि का पता चलता है, नजदीकी टीमों को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती है।
बच्चों की भागीदारी के मामले में अलग रुख
RPF के आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में बच्चे भी शामिल पाए गए हैं। पिछले वर्ष 32 घटनाओं में कार्रवाई नहीं की गई, क्योंकि उनमें 37 बच्चे शामिल थे। इसी तरह 2026 में अब तक ऐसी 6 घटनाएं दर्ज हुई हैं, जिनमें 11 बच्चे शामिल थे और उन पर भी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।
जागरूकता की कमी बड़ी वजह
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले बच्चों में जागरूकता और शिक्षा की कमी इस तरह की घटनाओं की एक प्रमुख वजह है। कई बच्चे ट्रैक के पास खेलते समय अनजाने में पत्थर फेंक देते हैं, जिससे गुजरती ट्रेनों पर असर पड़ता है। अधिकारियों ने इसे रोकने के लिए जागरूकता अभियान की जरूरत पर भी जोर दिया है।