नई दिल्ली। दिल्ली सरकार में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने के बाद सरकारी कामकाज की रफ्तार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कागजी प्रक्रिया पर निर्भरता कम होने के साथ ही अधिकतर प्रशासनिक कार्य अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए जा रहे हैं। इसके चलते फाइलों के निस्तारण में तेजी आई है और विभागीय कामकाज पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी हुआ है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1.4 लाख से अधिक ई-फाइलों और 9.2 लाख से ज्यादा ई-रसीदों का ऑनलाइन निपटारा किया जा चुका है। सरकार का दावा है कि इससे निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है और अनावश्यक देरी में कमी आई है।
235 विभाग जुड़े, 15 हजार से अधिक कर्मचारी सिस्टम पर सक्रिय
ई-ऑफिस सिस्टम का दायरा लगातार बढ़ रहा है। मार्च 2025 तक जहां 198 विभागों में करीब 5,000 कर्मचारी इससे जुड़े थे, वहीं जून 2026 तक यह संख्या बढ़कर 235 विभागों और लगभग 15,748 उपयोगकर्ताओं तक पहुंच गई है। इनमें सरकारी विभागों के साथ-साथ बोर्ड, निगम, स्वायत्त संस्थान और शैक्षणिक संस्थान भी शामिल हैं।
वर्तमान में 132 विभागों में यह व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू है, जहां हजारों अधिकारी रोजाना ऑनलाइन फाइलों का निपटारा कर रहे हैं।
फाइल ट्रैकिंग और जवाबदेही में सुधार
सरकार के मुताबिक, डिजिटल प्रणाली लागू होने से अब किसी भी फाइल की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकती है। इससे यह पता लगाना आसान हो गया है कि फाइल किस स्तर पर रुकी हुई है और देरी का कारण क्या है।
लाखों दस्तावेजों का डिजिटल निपटारा
1 जुलाई 2025 से 27 जून 2026 के बीच 1,14,603 ई-फाइलों और 7,14,091 ई-रसीदों का निस्तारण किया गया। सरकार का कहना है कि इस सिस्टम ने न केवल प्रक्रिया को तेज किया है बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ाई है।
75% से अधिक कार्यालय डिजिटल सिस्टम पर
वर्तमान में करीब 75 प्रतिशत सरकारी कार्यालय ई-ऑफिस से जुड़े हैं और डिजिटल तरीके से काम कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में इस व्यवस्था का और विस्तार करना है, ताकि प्रशासनिक सेवाएं अधिक तेज, पारदर्शी और जनता के अनुकूल बन सकें।