पटना में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर पूर्व डीजीपी अभयानंद ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम में मजिस्ट्रेट की मौजूदगी को लेकर भी आश्चर्य जताया और कहा कि समझ नहीं आता कि मौके पर एसडीएम की भूमिका क्या थी।

अपने बयान में अभयानंद ने कहा कि पुलिस कार्रवाई आमतौर पर दो तरह की परिस्थितियों में होती है—पहली, जब भीड़ या कानून-व्यवस्था की स्थिति संभालनी हो, जहां मजिस्ट्रेट और पुलिस दोनों की मौजूदगी जरूरी होती है। दूसरी स्थिति सामान्य आपराधिक कार्रवाई की होती है, जिसमें केवल पुलिस कार्य करती है। इस मामले को उन्होंने पूरी तरह क्राइम से जुड़ा बताते हुए कहा कि ऐसे हालात में एसडीएम की मौजूदगी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

पूर्व डीजीपी ने कहा कि जिलाधिकारी की भूमिका प्रशासनिक स्तर पर सीमित होती है और उनका हस्तक्षेप आमतौर पर दफ्तर तक ही रहता है। ऐसे में मौके पर एसडीएम की मौजूदगी उनकी समझ से परे है और यह एक ऐसा सवाल है जो उनके मन में लगातार बना हुआ है।

17 जून की मुठभेड़ में हुई थी भरत तिवारी की मौत

घटना 17 जून की है, जब बिलौटी गांव में पुलिस छापेमारी के दौरान भरत तिवारी और पुलिस के बीच मुठभेड़ हो गई थी। पुलिस के अनुसार, इस दौरान दोनों ओर से कई राउंड फायरिंग हुई, जिसमें आरोपी की ओर से 10 से 15 राउंड और पुलिस की ओर से पांच राउंड गोलीबारी की गई थी। इस दौरान कोई पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ था।

मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल भरत तिवारी को इलाज के लिए पीएमसीएच ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद दंडाधिकारी की निगरानी में शव का पोस्टमार्टम कराया गया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृतक के शरीर में कई गोलियां लगी थीं। एक गोली दाईं जांघ के अंदरूनी हिस्से में, दूसरी बाहरी हिस्से में और एक गोली बाएं पैर के पीछे के हिस्से में पाई गई। चार गोलियां शरीर को पार कर गई थीं, जबकि एक गोली शरीर के अंदर ही रह गई, जिसे पोस्टमार्टम के दौरान निकालकर सुरक्षित रखा गया है।