कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को सदन का माहौल उस समय गरमा गया, जब भाजपा विधायक अग्निमित्रा पाल और राज्य के शहरी विकास मंत्री व कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि विधानसभा अध्यक्ष को बीच में दखल देना पड़ा और कुछ टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाने का आदेश देना पड़ा।
बजट चर्चा के दौरान अल्पसंख्यकों के लिए आवंटन और मदरसा शिक्षा को लेकर दिए गए बयानों ने राजनीतिक टकराव को जन्म दिया। आसनसोल दक्षिण से भाजपा विधायक अग्निमित्रा पाल ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह वोट बैंक की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि मदरसा शिक्षा के बजट में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है, लेकिन इससे समाज को क्या ठोस लाभ मिला, यह सवाल बना हुआ है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार का यह कदम शिक्षा सुधार से अधिक राजनीतिक तुष्टीकरण से जुड़ा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार युवाओं को सही दिशा देने में विफल रही है, जिससे अपराध और असंतोष बढ़ रहा है।
इस पर मंत्री फिरहाद हकीम ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने भाजपा पर समुदाय विशेष को निशाना बनाने का आरोप लगाया और कहा कि देश की आज़ादी और सांस्कृतिक विरासत में मुस्लिम समाज की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम और काजी नजरुल इस्लाम जैसे नामों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी समुदाय को अपराध से जोड़ना गलत सोच को दर्शाता है।
बढ़ते विवाद के बीच संसदीय कार्य मंत्री शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने स्पीकर को पत्र लिखकर अग्निमित्रा पाल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिसका समर्थन कई अन्य मंत्रियों ने भी किया।
स्पीकर विमान बंद्योपाध्याय ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सदन में मर्यादा बनाए रखना सभी विधायकों की जिम्मेदारी है और किसी भी वर्ग को ठेस पहुंचाने वाली भाषा से बचना चाहिए। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के कई विधायक कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
वहीं सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में अग्निमित्रा पाल अपने बयान पर कायम रहीं। उन्होंने कहा कि सरकार को पिछले वर्षों का आंकड़ा सार्वजनिक करना चाहिए कि मदरसों से कितने छात्र उच्च प्रशासनिक या वैज्ञानिक पदों तक पहुंचे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि आगामी चुनावों में भाजपा विकास को ही मुख्य एजेंडा बनाएगी।