नई दिल्ली। देश में नक्सलवाद अब अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। पिछले एक दशक में 10,000 से अधिक माओवादी सक्रिय हथियारबंद कैडर ने आत्मसमर्पण किया है। सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और केंद्र सरकार की प्रभावी पुनर्वास योजनाओं ने माओवादी गतिविधियों को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। केंद्र सरकार ने 31 मार्च तक पूरे देश से नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य तय किया था।
आत्मसमर्पण की बढ़ती संख्या
आंकड़ों के अनुसार, 2025 में करीब 2,300 माओवादी हथियार डालकर हिंसा से अलग हुए। वहीं, 2026 की पहली तिमाही में ही 630 से अधिक कैडरों ने नक्सलवादी गतिविधियों को छोड़ दिया। सरकार ने अब पुरानी बिखरी हुई नीतियों की जगह एक ठोस और संगठित रणनीति अपनाई है।
लाल गलियारे में विकास और सड़क निर्माण
पहले 'लाल गलियारा' कहे जाने वाले बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में सड़क निर्माण और विकास कार्यों में ठेकेदारों को डर लगता था। अब सीमा सड़क संगठन (BRO) ने इन इलाकों में पांच मुख्य सड़कें और छह महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण किया है। माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में पिछले 10 वर्षों में 12,250 किलोमीटर से अधिक सड़कें बन चुकी हैं, जिससे प्रशासन और सुरक्षा बलों की पहुंच आसान हुई है।
सुरक्षा के मोर्चे पर बड़े बदलाव
साल 2014 में देश में केवल 66 मजबूत पुलिस स्टेशन थे, जो अब बढ़कर 586 हो गए हैं। पिछले छह वर्षों में 361 नए सुरक्षा कैंप बनाए गए हैं। नाइट ऑपरेशन क्षमता बढ़ाने के लिए 68 हेलिपैड बनाए गए। इसका असर यह हुआ कि माओवादी प्रभावित पुलिस स्टेशनों की संख्या 330 से घटकर 52 रह गई। छत्तीसगढ़ में अब माओवादी आंदोलन बड़े नेताओं के बिना रह गया है।
विकास योजनाओं से आम लोगों को फायदा
सरकार की योजनाओं का लाभ अब सीधे आम नागरिकों तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों की संख्या बढ़कर 2.54 लाख से अधिक हो गई है। आधार और आयुष्मान कार्ड के नामांकन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। शिक्षा के क्षेत्र में 250 एकलव्य मॉडल स्कूल मंजूर किए गए हैं, जिनमें 179 संचालन में हैं। इसके अलावा, 11 केंद्रीय विद्यालय और 6 नवोदय विद्यालय संचालित हो रहे हैं।
युवाओं के लिए रोजगार और तकनीकी अवसर
48 जिलों में आईटीआई और कौशल विकास केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिससे नक्सलियों की नई भर्ती रोकी जा रही है। संचार के लिए 9,000 मोबाइल टावर लगाए गए हैं। रेलवे ने बस्तर से छत्तीसगढ़ तक नई रेल लाइन बिछाई है और दंतेवाड़ा से मुनुगुरु तक नई रेल लाइन का सर्वे पूरा हो चुका है।
शहरी नक्सलियों पर नियंत्रण
नक्सलियों की फंडिंग रोकने के लिए एनआईए और ईडी ने करोड़ों रुपये की संपत्ति जब्त की है। सरकार की नई पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, ट्रेनिंग और घर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इस पूरी रणनीति का उद्देश्य न केवल नक्सलियों को खत्म करना है, बल्कि ग्रामीण और माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में विकास, सुरक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाकर स्थायी शांति स्थापित करना भी है।