सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2002 के चर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड में दोषी विकास यादव को सीमित अवधि की राहत प्रदान की। अदालत ने उसे होली के अवसर पर परिवार के साथ समय बिताने के लिए 7 मार्च तक फरलो (अस्थायी रिहाई) की अनुमति दी है।
विकास यादव इस मामले में 25 वर्ष की सजा काट रहा है और अब तक लगभग 23 वर्ष जेल में बिता चुका है। उसकी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि बिना मामले के व्यापक पहलुओं में गए, त्योहार के मद्देनज़र उसे निर्धारित अवधि तक रिहा करने की इजाजत दी जाती है।
सुनवाई के दौरान कुछ पक्षों ने उसकी रिहाई का विरोध किया, लेकिन अदालत ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। पीठ ने टिप्पणी की कि इतने लंबे समय तक सजा काटने के बाद भी यदि हर बार विरोध किया जाए, तो सुधार की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि समय-समय पर दी जाने वाली फरलो दोषी के पुनर्वास में सहायक हो सकती है।
इससे पहले 11 फरवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने उसकी 21 दिन की फरलो याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि वह गंभीर अपराध का दोषी है और दिल्ली जेल नियमावली, 2018 के तहत इस राहत का पात्र नहीं है।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विकास यादव निर्धारित शर्तों के साथ सीमित अवधि के लिए जेल से बाहर रह सकेगा।