नई दिल्ली: भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने बुधवार को नौसेना अलंकरण समारोह-2026 में खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना समुद्र से पाकिस्तान पर हमला करने ही वाली थी, लेकिन उस समय कार्रवाई को रोकने का अनुरोध किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर में नौसेना की तत्परता
एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर पिछले साल पहलगाम आतंक हमले के बाद शुरू किया गया था। इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने त्वरित तैनाती और आक्रामक रुख का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, “यह अब कोई छिपी हुई बात नहीं है कि जब हम पाकिस्तान पर समुद्र से हमला करने ही वाले थे, तभी कार्रवाई रोकने का अनुरोध आया।”
समारोह में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में विशेष सेवा देने वाले दो वरिष्ठ अधिकारियों को युद्ध सेवा पदक भी प्रदान किए।
साहस और राहत अभियान में योगदान
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना ने फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई। म्यांमार में ऑपरेशन ब्रह्मा और श्रीलंका में ऑपरेशन सागर बंधु जैसे राहत और बचाव अभियान कम समय में और कठिन परिस्थितियों में सफलतापूर्वक चलाए गए।
उन्होंने यह भी बताया कि आत्मनिर्भरता पर लगातार ध्यान देने से नौसेना अब अपने जहाज और पनडुब्बियां खुद बना रही है। पिछले साल 12 नए जहाज और पनडुब्बियां नौसेना में शामिल की गईं।
तकनीक और रणनीति में बदलाव
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक और नई रणनीतियों ने युद्ध की योजना बनाने और संचालन के तरीके बदल दिए हैं। समुद्री माहौल की मांग अब फुर्ती, दूरदर्शिता और व्यक्तिगत साहस की है। उन्होंने गर्व से कहा कि भारतीय नौसेना ने इन सभी चुनौतियों का सामना किया और कई उपलब्धियां हासिल की हैं।
पश्चिम एशिया संकट पर बयान
पश्चिम एशिया में संघर्ष के बारे में उन्होंने कहा कि अमेरिका, इस्राइल और ईरान के युद्ध के कारण क्षेत्र में 20 से अधिक व्यापारिक जहाजों पर हमला हुआ है। लगभग 1,900 जहाज फंसे हुए हैं, और होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना गुजरने वाले जहाजों की संख्या 130 से घटकर 6-7 रह गई है।
एडमिरल त्रिपाठी ने यह भी बताया कि भारतीय नौसेना न केवल युद्ध की स्थिति में बल्कि सामरिक, तकनीकी और मानवीय चुनौतियों में भी अपने प्रदर्शन से देश का भरोसा मजबूत करती रही है।