संसद में जारी गतिरोध के बीच विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत स्पीकर को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय में मंगलवार को जमा किया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इसकी जानकारी दी।

118 विपक्षी सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नोटिस पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें कांग्रेस, डीएमके और सपा के सांसद शामिल हैं। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर लगातार विपक्षी सांसदों को जनहित के मुद्दों पर बोलने से रोक रहे हैं और खुलेआम पक्षपाती रवैया अपना रहे हैं।

विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि आठ सांसदों को केवल लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए मनमाने तरीके से पूरे बजट सत्र से निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा कई अवसरों पर विपक्षी नेताओं को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जो उनके मौलिक अधिकार का हिस्सा है।

कांग्रेस सांसद और चीफ व्हिप सुरेश ने इस नोटिस को विभिन्न विपक्षी दलों की ओर से लोकसभा सचिवालय में पेश किया। ध्यान देने योग्य है कि टीएमसी के सांसद इस नोटिस का हिस्सा नहीं हैं।

राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने पर हंगामा

लोकसभा में राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने के आरोप ने भी विपक्षी गुस्से को हवा दी है। 2 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान, राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब में कथित तौर पर लिखी गई बातों को लेकर सरकार पर निशाना साधा था। हालांकि सरकार ने उनके आरोप खारिज कर दिए।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार के दबाव में लोकसभा स्पीकर ने राहुल गांधी को सदन में बोलने से रोक दिया। 4 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी का लोकसभा में संबोधन होना था, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया। अगले दिन स्पीकर ने कहा कि कई विपक्षी सांसदों का व्यवहार उग्र और लोकतांत्रिक गरिमा के अनुरूप नहीं था, और सुरक्षा कारणों से पीएम का संबोधन टालना पड़ा।

विपक्ष ने स्पीकर के इस दावे को खारिज करते हुए उन पर पक्षपाती होने का आरोप लगाते हुए चिट्ठी भी भेजी। नोटिस में इस बात पर भी जोर दिया गया कि आठ विपक्षी सांसदों को मनमाने ढंग से पूरे सत्र से निलंबित किया गया, जबकि वे केवल लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे थे।