नई दिल्ली। लोकसभा में शुक्रवार को परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर जारी बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। इस दौरान सदन में तीखी बहस देखने को मिली।

चर्चा के बीच अमित शाह ने कहा कि विपक्ष इस संशोधन विधेयक का विरोध कर रहा है, जबकि सभी राजनीतिक दलों ने शुरुआत में इसका समर्थन करने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में विपक्ष ने “अगर-मगर और किंतु-परंतु” के साथ इस विधेयक का विरोध शुरू कर दिया।

गृह मंत्री ने कहा कि यह केवल प्रक्रिया का नहीं बल्कि मूल रूप से महिला आरक्षण का विरोध है, जिसका उद्देश्य महिलाओं का सशक्तिकरण करना है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन के दौरान संसदीय क्षेत्रों के पुनर्गठन की प्रक्रिया संविधान के तहत होती है और इसमें जनसंख्या के आधार पर बदलाव स्वाभाविक है।

अमित शाह ने कहा कि 1971 के बाद लोकसभा सीटों की संख्या को फ्रीज कर दिया गया था, जिसके कारण लंबे समय से जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व का संतुलन नहीं बन पाया। उन्होंने बताया कि देश में कई लोकसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां मतदाताओं की संख्या 20 लाख से अधिक है, जिससे सांसदों के लिए प्रभावी प्रतिनिधित्व करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि परिसीमन आयोग जमीनी स्तर पर जाकर सभी पहलुओं का अध्ययन करता है और इसी प्रक्रिया के आधार पर आगे निर्णय लिए जाते हैं। उनके अनुसार, सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के चुनावों से पहले इस सुधार को लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकार के तहत आरक्षण मिल सके।

गृह मंत्री ने यह भी बताया कि जनगणना से जुड़े कार्यों में देरी का मुख्य कारण कोविड-19 महामारी रही है। उन्होंने कहा कि अब सरकार ने 2026 की जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लिया है, जिसे कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर अनावश्यक भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है, जबकि सरकार सभी राज्यों और वर्गों के समान विकास और प्रतिनिधित्व के लिए प्रतिबद्ध है।