नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन आधारित तीन संशोधित विधेयकों पर चर्चा के दौरान गुरुवार को जमकर राजनीतिक घमासान देखने को मिला। चर्चा के बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए, जिसके बाद सदन में तीखी नोकझोंक और नारेबाजी शुरू हो गई।
राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण को लेकर लाया गया मौजूदा ढांचा वास्तविक सशक्तिकरण की दिशा में नहीं है। उन्होंने 2023 के पुराने महिला आरक्षण विधेयक को फिर से लाने की मांग करते हुए कहा कि विपक्ष उसे तुरंत पास कराने में पूरा सहयोग देगा। साथ ही उन्होंने दावा किया कि सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने से बच रही है।
सदन में राहुल गांधी के एक कथित ‘छिपी ताकत’ वाले बयान के बाद माहौल और गरमा गया। उनके बयान को लेकर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई और हंगामा शुरू कर दिया। एनडीए सांसदों ने इसे प्रधानमंत्री और सरकार पर निशाना बताया, जबकि राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है।
विवाद बढ़ने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस तरह की भाषा प्रधानमंत्री और संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी आपत्ति जताते हुए कहा कि जिम्मेदार पद पर बैठे नेता को संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।
स्थिति बिगड़ने पर लोकसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। हालांकि राहुल गांधी ने दोबारा बोलने की कोशिश की, लेकिन लगातार शोर-शराबे के कारण उन्हें बैठने के लिए कहा गया।
इसी दौरान राहुल गांधी ने जाति जनगणना के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि केवल जनगणना करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि इसका उपयोग राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय करने में किया जाएगा या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस प्रक्रिया को प्रतिनिधित्व से अलग रखने की कोशिश कर रही है, जो सामाजिक न्याय के खिलाफ है।
पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में भारी हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, जिससे महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर चर्चा कई बार बाधित हुई।