शामली। जिले के थानाभवन ब्लॉक के गांव काजीपुरा जसाना उर्फ मस्तगढ़ में मनरेगा के तहत किए गए कार्यों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि कागजों पर दिखाए गए अधिकांश काम वास्तव में हुए ही नहीं, बावजूद इसके लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
यह मामला तब सामने आया जब गांव निवासी अभिषेक निर्वाल ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने ग्राम प्रधान, सचिव और ठेकेदार पर मिलीभगत कर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार तिवारी ने जांच के आदेश दिए और यह जिम्मेदारी मनरेगा लोकपाल को सौंपी गई।

जांच के दौरान पाया गया कि वर्ष 2021 से 2026 के बीच मनरेगा के तहत कुल 44 कार्य दर्ज किए गए थे। इनमें से केवल चार कार्य ही मौके पर सही पाए गए, जबकि बाकी 40 कार्यों का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं मिला। इसके बावजूद इन कार्यों के नाम पर करीब 35 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका था।
इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि कुछ ऐसे लोगों के खातों में भी मजदूरी का पैसा ट्रांसफर किया गया, जिन्होंने गांव में कोई काम किया ही नहीं था। इस पूरे मामले ने ग्राम पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन अब रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी में है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।