नई दिल्ली। भारत ने चीन की ओर से भारत-पाक सीजफायर में मध्यथता के दावे का सिरे से खारिज कर दिया है। भारतीय सरकार के सूत्रों का कहना है कि मई के संघर्ष के दौरान युद्धविराम तक पहुंचने में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं हुई थी।

सूत्रों के मुताबिक, भारत का रुख इस मुद्दे पर शुरू से स्पष्ट रहा है कि भारत-पाकिस्तान से जुड़े मामलों में बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद संघर्षविराम को लेकर बातचीत दोनों देशों के सैन्य स्तर पर सीधे तौर पर हुई थी। पाकिस्तान की ओर से भारत के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) से संपर्क किया गया था, जिसके बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी।

चीन के दावे पर भारत की आपत्ति
हाल ही में चीन ने दावा किया था कि उसने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि इस वर्ष चीन ने कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में हस्तक्षेप कर समाधान की कोशिश की, जिनमें भारत-पाक तनाव भी शामिल है।

गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सात से दस मई के बीच सैन्य टकराव हुआ था, जिसके बाद दस मई को संघर्षविराम की घोषणा की गई। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार इस संघर्षविराम का श्रेय खुद को दे चुके हैं, लेकिन भारत ने हर बार स्पष्ट किया है कि यह फैसला दोनों देशों की सेनाओं के डीजीएमओ के आपसी संवाद से हुआ था।

भारत सरकार का कहना है कि वह किसी भी तरह की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता। अधिकारियों ने साफ किया कि चीन या किसी अन्य देश द्वारा किए जा रहे ऐसे दावे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर श्रेय लेने की कोशिश भर हैं।

वांग यी ने अपने संबोधन में यह भी कहा था कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मौजूदा समय में क्षेत्रीय संघर्षों और सीमा पार तनाव में बढ़ोतरी हुई है और चीन ने कई वैश्विक मुद्दों में संतुलित और निष्पक्ष भूमिका निभाने का प्रयास किया है। हालांकि भारत ने भारत-पाक संदर्भ में इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।