सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बाबर के नाम पर किसी मस्जिद के निर्माण या उसका नाम रखने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने इस दलील को भी मान्य नहीं माना कि ऐसी संरचनाएं एक “क्रूर हमलावर” का सम्मान करती हैं।

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। याचिका में तर्क दिया गया था कि बाबर हिंदू-विरोधी था और हिंदुओं की हत्या में शामिल था, इसलिए उनके नाम पर कोई मस्जिद नहीं बनाई जानी चाहिए।

मुर्शिदाबाद मस्जिद का मामला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बन रही मस्जिद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बाबर के नाम पर यहां मस्जिद का निर्माण हो रहा है, जबकि बाबर को हिंदू-विरोधी और क्रूर हमला करने वाला माना जाता है।

इस विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब टीएमसी विधायक रह चुके हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के निर्माण की घोषणा की थी। इस पर कई हिंदू संगठनों और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने आपत्ति जताई थी। भारी विरोध के बाद हुमायूं कबीर को टीएमसी से निलंबित कर दिया गया।

नया राजनीतिक दल और निर्माण की जानकारी

इसके बाद हुमायूं कबीर ने ‘जनता उन्नयन पार्टी’ नाम से नया राजनीतिक दल बनाया और मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का निर्माण शुरू कराया। इस मस्जिद की नींव 6 दिसंबर 2025 को रखी गई थी, अयोध्या के विवादित ढांचे को गिराए जाने की बरसी पर।

हुमायूं कबीर ने बताया कि मस्जिद का निर्माण तीन साल के भीतर पूरा किया जाएगा। इस ढांचे में लगभग 55 करोड़ रुपये की लागत आएगी। मस्जिद के मुख्य द्वार की ऊंचाई 14 मीटर और चौड़ाई 5 मीटर होगी। अकेले द्वार के निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 5 करोड़ रुपये है।