नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार शाम पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न हालात की समीक्षा के लिए वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा जैसे आम लोगों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित की गई।

बैठक में शामिल शीर्ष मंत्री और अधिकारी

इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान, जेपी नड्डा, अश्विनी वैष्णव, हरदीप पुरी, मनोहर लाल खट्टर, प्रल्हाद जोशी और के राममोहन नायडू सहित कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे।
साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, वित्त सचिव शक्तिकांत दास और कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन भी बैठक में उपस्थित थे।

पीएम मोदी का पहले का रुख

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में पहले ही पश्चिम एशिया में युद्ध की गंभीरता पर ध्यान दिलाया था। उन्होंने देशवासियों से एकजुट होकर इस संकट का सामना करने की अपील की थी और राजनीतिक लाभ के लिए इस स्थिति का उपयोग करने वालों को चेतावनी दी थी। मोदी ने अफवाह फैलाने वालों को भी देश के लिए नुकसानदेह बताया।

संसदीय समीक्षा बैठकें

प्रधानमंत्री ने पहले 22 मार्च को इसी समूह के मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की थी। उस समय खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा सहित नागरिकों की जरूरतों का आकलन किया गया था। प्रधानमंत्री ने सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिए कि वे मिलकर काम करें और आम लोगों को कम से कम असुविधा हो।

उन्होंने 12 मार्च को भी चेतावनी दी थी कि पश्चिम एशिया का युद्ध वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा है, जिसे शांति, धैर्य और जागरूकता से सामना करना होगा।

पश्चिम एशिया की स्थिति

यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद शुरू हुआ। इसके जवाब में ईरान ने इस्राइल और खाड़ी देशों को निशाना बनाया। ईरान के नियंत्रण वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति होती है। संघर्ष के कारण इस मार्ग से कम ही जहाज गुजर पा रहे हैं, जिससे भारत समेत कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है।

संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस, नीदरलैंड, मलेशिया, इस्राइल और ईरान के नेताओं से लगातार बातचीत की। इसके अलावा 24 मार्च को उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप से भी फोन पर चर्चा की और स्थिति पर उपयोगी विचार-विमर्श किया।