ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने देश में कृषि तैयारियों को लेकर भरोसा जताया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव मनिंदर कौर द्विवेदी ने बताया कि आने वाले बुआई सीजन के लिए देश में बीजों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी तरह की कमी की आशंका नहीं है।
सरकार के अनुसार, भारत का बीज तंत्र काफी मजबूत है, जिसमें निजी क्षेत्र के साथ-साथ आईसीएआर और सरकारी संस्थानों की भी अहम भूमिका है। सभी स्तर—सर्टिफाइड, फाउंडेशन और हाइब्रिड बीज—पर पर्याप्त स्टॉक और उत्पादन की व्यवस्था मौजूद है। खरीफ सीजन 2026 के लिए करीब 19.29 लाख क्विंटल अतिरिक्त बीज उपलब्ध है, जो जरूरत से अधिक है।
द्विवेदी ने बताया कि देश में कुल 166.46 लाख क्विंटल बीज की मांग के मुकाबले 185.74 लाख क्विंटल उपलब्ध हैं। इसके अलावा रबी सीजन के लिए भी आवश्यक बीज और अन्य इनपुट पहले से तैयार हैं।
कीमतों की स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों के थोक दाम फिलहाल सामान्य स्तर पर हैं। टमाटर, प्याज और आलू जैसी प्रमुख फसलों की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है और हाल के दिनों में इनमें सुधार के संकेत भी मिले हैं।
ईंधन और उर्वरक की आपूर्ति को लेकर भी सरकार सतर्क है। मक्के के बीज सुखाने के लिए एलपीजी और पीएनजी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी गई है, जबकि तेल विपणन कंपनियों को निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उर्वरकों की उपलब्धता भी संतोषजनक बताई गई है।
सरकार के मुताबिक, खरीफ 2026 के लिए देश में उर्वरकों की कुल जरूरत 390.54 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है, जिसमें से लगभग 46 प्रतिशत पहले से उपलब्ध है। राज्यों के साथ समन्वय कर खाद की समय पर आपूर्ति और सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। जमाखोरी और गैर-कृषि उपयोग पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।
इसके साथ ही सरकार नैनो और जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है, ताकि पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हो सके। कई राज्यों में खाद की बिक्री को किसानों के डेटा और जमीन के रिकॉर्ड से जोड़ने की पहल भी की गई है।
कीटनाशकों की उपलब्धता को लेकर भी सरकार ने आश्वासन दिया है कि मांग के मुकाबले पर्याप्त उत्पादन और स्टॉक मौजूद है। नकली और मिलावटी उत्पादों पर रोक लगाने के लिए राज्यों के साथ मिलकर सख्त कार्रवाई की जा रही है, साथ ही टिकाऊ खेती और जैविक विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि वह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है और साप्ताहिक आधार पर स्थिति की समीक्षा की जा रही है, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।