नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने नए कार्यस्थल ‘सेवा तीर्थ’ परिसर से आधिकारिक रूप से कामकाज की शुरुआत की। इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय औपनिवेशिक काल की पहचान माने जाने वाले साउथ ब्लॉक से संचालित होता था। संयोगवश 13 फरवरी की तारीख ऐतिहासिक भी है—इसी दिन 1931 में नई दिल्ली को आधुनिक भारत की राजधानी के रूप में औपचारिक मान्यता मिली थी।

एकीकृत प्रशासनिक परिसर की शुरुआत

‘सेवा तीर्थ’ परिसर को इस तरह विकसित किया गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय एक ही स्थान से संचालित हो सकें। नई व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न शीर्ष संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

कार्यभार ग्रहण करने से पहले प्रधानमंत्री ने परिसर में स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। भवन की दीवार पर देवनागरी लिपि में ‘सेवा तीर्थ’ अंकित है और उसके साथ ‘नागरिक देवो भव’ का संदेश लिखा गया है, जो नागरिकों को शासन के केंद्र में रखने की अवधारणा को रेखांकित करता है। इस अवसर पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

पदभार संभालते ही लिए अहम फैसले

नए कार्यालय से काम शुरू करते ही प्रधानमंत्री ने कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें ‘पीएम राहत योजना’ की शुरुआत शामिल है। इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में इलाज में देरी न हो।

‘लखपति दीदी’ अभियान को नई रफ्तार

महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ‘लखपति दीदी’ पहल के तहत तीन करोड़ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य पहले ही तय समय से पहले पूरा किया जा चुका है। अब सरकार ने मार्च 2029 तक इस संख्या को छह करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसे ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त सहारा

किसानों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कृषि अवसंरचना कोष की सीमा बढ़ाकर दो लाख करोड़ रुपये कर दी गई है। इससे भंडारण, प्रसंस्करण और कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

स्टार्टअप को मिलेगा नया प्रोत्साहन

उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ को 10,000 करोड़ रुपये की राशि के साथ स्वीकृति दी गई है। इस कोष का फोकस डीप टेक, उन्नत विनिर्माण और शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को वित्तीय सहयोग प्रदान करना रहेगा।

नए परिसर से कामकाज की शुरुआत को प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और नीति क्रियान्वयन की गति बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।