लोकसभा और राज्यसभा के कुल 193 सांसदों ने एक नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की गई है। सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि यह नोटिस कल किसी एक सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है, हालांकि अभी यह तय नहीं है कि इसे किस सदन में सौंपा जाएगा। विपक्षी नेताओं का कहना है कि नोटिस पर सांसदों ने बहुत उत्साह के साथ हस्ताक्षर किए। आवश्यक संख्या पहले ही पूरी हो चुकी थी, बावजूद इसके गुरुवार को कई सांसद आगे आकर अपना समर्थन दर्ज करवा रहे थे।
नियम क्या कहते हैं?
सीईसी को हटाने के लिए नियम के अनुसार लोकसभा में कम से कम 100 सांसद और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं।
सत्ता विरोधी दलों और आप ने भी समर्थन दिया
सूत्रों के मुताबिक नोटिस पर इंडिया ब्लॉक के विभिन्न दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी (आप) के सांसदों ने भी अपना समर्थन दिया, हालांकि आप अब इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं है।
सीईसी पर लगाए गए आरोप
यह पहली बार है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए औपचारिक नोटिस पेश किया जा रहा है। एक उच्च पदस्थ अधिकारी के अनुसार, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सात गंभीर आरोप हैं। इनमें पद का दुरुपयोग, पक्षपातपूर्ण व्यवहार, चुनावी जांच में जानबूझकर बाधा डालना और बड़ी संख्या में मतदाताओं को मतदान से वंचित करना शामिल है। विपक्ष का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसे कार्यों के दौरान सीईसी भाजपा के पक्ष में काम कर रहे हैं।