कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को तिरुवनंतपुरम में टेक्नोपार्क में आईटी पेशेवरों से बातचीत करते हुए चीन की औद्योगिक प्रणाली की सराहना करते हुए भारत की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि चीन ने दुनिया में एक बेजोड़ औद्योगिक ढांचा खड़ा कर लिया है, लेकिन उसकी व्यवस्था दबावपूर्ण और अलोकतांत्रिक है।

राहुल गांधी ने इस दौरान कहा कि चीन ने औद्योगिक उत्पादन में बहुत आगे बढ़कर कब्जा कर लिया है, जबकि कई देश, जिनमें भारत और अमेरिका शामिल हैं, केवल खपत पर ध्यान दे रहे हैं। उनके अनुसार, असली रोजगार वही पैदा करता है जहां उत्पादन होता है, केवल खपत में नहीं। उन्होंने कहा कि भारत ने चीन को इस क्षेत्र में इतनी स्वतंत्रता देने की गलती की है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता ने यह भी कहा कि अगर भारत लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखते हुए मजबूत औद्योगिक प्रणाली विकसित कर ले, तो यह न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभकारी होगा। उन्होंने इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी आधारित सैन्य और औद्योगिक तकनीक में चीन के दबदबे को भी चिन्हित किया और कहा कि भारत इस क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में शामिल होकर रोजगार और तकनीकी विकास में बड़ा कदम उठा सकता है।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि भारत में अभी बहुत कम कंपनियां औद्योगिक उत्पादन में सक्रिय हैं। उन्होंने बड़े कॉरपोरेट समूहों, जैसे गौतम अदाणी और मुकेश अंबानी, का उदाहरण देते हुए कहा कि ये कंपनियां उत्पादन के बजाय उत्पाद बेच रही हैं, जो स्थानीय उद्योगों को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने उत्पादन को बढ़ावा देने वाली नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया।

इसके साथ ही, उन्होंने मौजूदा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली पर भी सवाल उठाया, जिसका असर उत्पादन करने वाले राज्यों पर नकारात्मक और खपत करने वाले राज्यों पर सकारात्मक पड़ता है। उन्होंने भारत-अमेरिका समझौते का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के महत्वपूर्ण डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना किसी समझौते में जाना सही नहीं है।

राहुल गांधी ने कहा कि भारत में बहुत बड़ी विविधता है और देश के पास दुनिया का सबसे बड़ा डेटा भंडार है। साथ ही, यहां बेहतरीन इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रतिभाएं हैं, जैसे कि केरल में उच्च गुणवत्ता वाली नर्सिंग। इसलिए किसी भी अंतरराष्ट्रीय बातचीत में यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारत की ताकत कहां है और उसी आधार पर रणनीति तय करनी चाहिए।