संपूर्ण भारत शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के राष्ट्रीय अधिवेशन में रविवार को देशभर के शिया समुदाय के मुद्दों पर चर्चा की गई। इस अधिवेशन में मॉब लिंचिंग, यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (यूसीसी), हिजाब का अधिकार, वंदेमातरम, आतंकवाद, और शिया समुदाय की राजनीतिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार विमर्श हुआ।
हुसैनाबाद के बड़े इमामबाड़े में आयोजित अधिवेशन में बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि मॉब लिंचिंग देश में फैल रही गंभीर समस्या है, जिसे रोकने के लिए कड़े कानून बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड को लागू न करने की मांग की और कहा कि हिजाब या घूंघट किसी मज़हब का मामला नहीं बल्कि महिलाओं की इज्जत का प्रतीक हैं, और संविधान इसके उपयोग का अधिकार देती है।
बोर्ड ने प्रस्ताव पारित कर मॉब लिंचिंग को आतंकवाद के तहत आने वाला अपराध घोषित करने और इसके खिलाफ कानून बनाने की मांग उठाई। इसके अलावा, अधिवेशन में शिया समुदाय के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने, स्कूलों के पाठ्यक्रम में इमाम हुसैन की जीवनी शामिल करने, वक्फ़ संशोधन कानून को वापस लेने, हुसैनाबाद ट्रस्ट की इमारतों की मरम्मत कराने और आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों की स्थापना जैसी मांगें भी की गईं।
बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना साएम मेहंदी ने अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए बोर्ड के उद्देश्य और दिशा को स्पष्ट किया। जम्मू-कश्मीर के मौलाना आगा सैय्यद अब्बास रिजवी ने वंदेमातरम के नाम पर उत्पीड़न पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत माता को सम्मान देने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन धार्मिक स्वतंत्रता और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होना चाहिए।
इस अधिवेशन में देशभर के शिया नेता शामिल रहे, जिनमें पश्चिम बंगाल के मौलाना फिरोज, बिहार के मौलाना असद यावर, झारखंड के मौलाना मूसी रजा, दिल्ली के मौलाना मेहंदी माज़िद, मुंबई के मौलाना जहीर अब्बास, पंजाब के मौलाना अनीस हैदर, नेपाल के मौलाना जैनुल आबदीन और बांग्लादेश के मौलाना आफताब प्रमुख थे।