लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को लेकर उनकी पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अंगमो ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत की गई कार्रवाई को चुनौती देते हुए पति की तत्काल रिहाई की मांग की है। वांगचुक को 24 सितंबर को लेह में हिंसक झड़पों के कुछ दिनों बाद हिरासत में लिया गया था। फिलहाल वे राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद हैं।

अंगमो ने 2 अक्तूबर को संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर कर गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि अब तक उन्हें गिरफ्तारी आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई है और न ही वांगचुक से मुलाकात की इजाजत दी गई है। उनके अनुसार यह नियमों का सीधा उल्लंघन है।

इससे पहले भी अंगमो ने लद्दाख पुलिस महानिदेशक के बयानों को झूठा करार देते हुए आरोप लगाया था कि वांगचुक को एक सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया गया है। उन्होंने कहा था कि घटना के वक्त वांगचुक शांतिपूर्वक भूख हड़ताल पर बैठे थे और किसी भी तरह की हिंसा में शामिल नहीं थे। अंगमो ने यह भी सवाल उठाया कि नागरिकों पर गोली चलाने का आदेश किसके निर्देश पर दिया गया।

आंदोलन और हिंसा की पृष्ठभूमि

अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन कर लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। तभी से स्थानीय संगठनों और नागरिकों की ओर से छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठ रही है।

इसी मांग को लेकर सोनम वांगचुक ने 35 दिनों का धरना शुरू किया था। 10 सितंबर से वे और लद्दाख एपेक्स बॉडी (एलएबी) के कई कार्यकर्ता भूख हड़ताल पर बैठे थे। आंदोलन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं की तबीयत बिगड़ी और लेह बंद का आह्वान किया गया। बंद के दिन बड़ी संख्या में युवक सड़कों पर उतरे और पुलिस-प्रशासन के साथ टकराव हो गया। इस दौरान पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं, जिसके बाद प्रशासन ने वांगचुक को एनएसए के तहत गिरफ्तार कर लिया।