पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा जारी एक कथित स्टिंग वीडियो ने राज्य की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस वीडियो में आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रमुख और पूर्व टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर को भाजपा के साथ करोड़ों रुपये की कथित डील करते हुए दिखाने का दावा किया गया है। हालांकि, कबीर ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया है।

क्या है विवाद का केंद्र?

टीएमसी की ओर से जारी लगभग 19 मिनट के वीडियो में आरोप लगाया गया है कि हुमायूं कबीर भाजपा के साथ मिलकर राज्य की ममता बनर्जी सरकार को अस्थिर करने की योजना बना रहे थे। वीडियो में दावा किया गया है कि इस कथित सौदे की कीमत करीब 1,000 करोड़ रुपये तय हुई थी, जिसमें से 200 करोड़ रुपये एडवांस के तौर पर मिलने की बात भी कही गई है।

वीडियो में यह भी दावा किया गया कि कबीर मुस्लिम वोटों को विभाजित कर भाजपा को चुनावी लाभ पहुंचाने की बात कर रहे थे और इसके बदले उन्हें राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाने का वादा किया गया था।

कबीर का पलटवार: वीडियो को बताया फर्जी

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए हुमायूं कबीर ने वीडियो को पूरी तरह मनगढ़ंत और एडिटेड बताया। उनका कहना है कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई है।

कबीर ने भावुक अंदाज में कहा कि वे कभी भाजपा के साथ नहीं जाएंगे और यह सब उनकी बढ़ती राजनीतिक लोकप्रियता से घबराकर किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को लेकर वे हाईकोर्ट का रुख करेंगे और टीएमसी नेतृत्व, खासकर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ 2,000 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर करेंगे।

गठबंधन टूटा, जांच की मांग

इस विवाद के बाद राजनीतिक समीकरणों में भी बदलाव देखने को मिला है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की पार्टी एजेयूपी के साथ अपना गठबंधन समाप्त कर दिया है।

वहीं, टीएमसी नेताओं कुणाल घोष और फिरहाद हकीम ने मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर पैसे की डील की बात सामने आई है, तो उसके स्रोत की भी जांच होनी चाहिए।

चुनाव आयोग की भी नजर

मामले ने तूल पकड़ने के बाद चुनाव आयोग ने भी संकेत दिए हैं कि यदि औपचारिक शिकायत दर्ज होती है तो इस पूरे प्रकरण की पुलिस जांच कराई जा सकती है। फिलहाल हुमायूं कबीर ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस विवाद में पीछे नहीं हटेंगे और अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।