राजनीति में अपनी नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत करते हुए राघव चड्ढा ने अपने हालिया फैसले को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है। सोमवार को उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया।

राघव चड्ढा ने कहा कि पार्टी बदलने की घोषणा के बाद से उन्हें लगातार संदेश मिल रहे हैं—कुछ लोग शुभकामनाएं दे रहे हैं, जबकि कई यह जानना चाहते हैं कि उन्होंने यह निर्णय क्यों लिया।

उन्होंने बताया कि राजनीति में आने से पहले वह एक चार्टर्ड अकाउंटेंट थे और उनके पास एक मजबूत करियर विकल्प मौजूद था, लेकिन उन्होंने उसे छोड़कर राजनीति को चुना। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य कभी भी केवल अपना करियर बनाना नहीं रहा, बल्कि वे एक राजनीतिक विचारधारा और पार्टी को मजबूत करने के लिए आए थे।

राघव चड्ढा ने आगे कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्षों दिए, वह अब पहले जैसी नहीं रही। उनके अनुसार, पिछले कुछ समय में संगठन के भीतर कामकाज का माहौल बदल गया है, जहां काम करने की आजादी और संसद में बोलने के अवसरों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में उन्हें महसूस होने लगा था कि शायद वह सही व्यक्ति गलत राजनीतिक माहौल में हैं। इस स्थिति में उनके सामने तीन विकल्प थे—राजनीति छोड़ देना, मौजूदा पार्टी में रहकर सुधार की कोशिश करना, या फिर नई ऊर्जा के साथ किसी अन्य मंच से आगे बढ़ना। अंततः उन्होंने तीसरा विकल्प चुना।

राघव चड्ढा ने दावा किया कि केवल उन्होंने ही नहीं, बल्कि उनके साथ कई अन्य सांसदों ने भी इसी तरह का निर्णय लिया है। उनके अनुसार, अगर एक या दो लोग असंतोष जताते हैं तो उसे व्यक्तिगत माना जा सकता है, लेकिन जब कई लोग एक साथ दूरी बना लें तो स्थिति पर सवाल उठते हैं।

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई कार्यस्थल असहज और दबाव वाला माहौल बन जाए, तो वहां काम करना कठिन हो जाता है और ऐसे में बदलाव जरूरी हो जाता है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ उन्होंने भी आगे बढ़ने का फैसला लिया।

अंत में उन्होंने लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे जनता के मुद्दों को पहले से अधिक मजबूती और ऊर्जा के साथ उठाते रहेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब वे न केवल समस्याएं उठाएंगे, बल्कि उनके समाधान की दिशा में भी सक्रिय रूप से काम करेंगे।