कोलकाता में विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ते असंतोष और गुटबाजी के बीच पार्टी नेतृत्व ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। बुधवार को पार्टी ने राज्य की सभी प्रमुख समितियों और सहयोगी संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग करने की घोषणा कर दी।

पार्टी की ओर से कहा गया है कि अब संगठनात्मक ढांचे का व्यापक स्तर पर पुनर्गठन किया जाएगा। इसके लिए प्रदर्शन समीक्षा, आत्ममंथन और आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसके बाद नई टीम का गठन किया जाएगा।

संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पार्टी के भीतर नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया को लेकर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। नेतृत्व का मानना है कि मौजूदा ढांचे की समीक्षा कर उसे अधिक प्रभावी और मजबूत बनाया जाना जरूरी है।

58 विधायकों के पत्र के बाद बढ़ा सियासी तनाव

इसी बीच निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी 58 विधायकों के समर्थन पत्र के साथ विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे पार्टी के भीतर संभावित बड़े विभाजन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, असंतुष्ट खेमे द्वारा भेजे गए पत्र में ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष के रूप में ही उल्लेखित किया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि विवाद सीधे उनके नेतृत्व से नहीं बल्कि विधायक दल के संचालन और आंतरिक व्यवस्था को लेकर है।

बागी विधायकों की बढ़ती भूमिका

विवाद की मुख्य वजह विपक्ष के नेता और अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर बताया जा रहा है। असंतुष्ट विधायकों का दावा है कि उनके हस्ताक्षरों का गलत इस्तेमाल किया गया, जबकि पार्टी ने इन आरोपों को खारिज किया है।

इसी विवाद के चलते ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पहले ही पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है। अब ऋतब्रत इस गुटबाजी के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद अब केवल पदों या नियुक्तियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तृणमूल विधायक दल के नियंत्रण और संगठनात्मक वैधता की बड़ी राजनीतिक लड़ाई में बदलता जा रहा है।