नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि क्षेत्र में चल रहे पुराने ट्रक और बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा और उनकी जगह बीएस-6 तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि वाहनों से होने वाला प्रदूषण दिल्ली-एनसीआर की हवा को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है, इसलिए इस दिशा में यह कदम जरूरी है।
वाहनों के मालिकों को मिलेंगे बड़े लाभ
इस योजना के तहत पुराने ट्रक और बस मालिकों को नई गाड़ियों की ओर प्रोत्साहित करने के लिए कई आर्थिक सुविधाएं दी जाएंगी। इनमें पांच साल के ऋण पर पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी और हर महीने ईंधन वाउचर जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
राज्य सरकारें भी इस योजना में सहयोग करते हुए पंजीकरण शुल्क माफ करेंगी और नए वाहनों पर 100 प्रतिशत तक तथा पुराने वाहनों पर 50 प्रतिशत तक मोटर वाहन कर में छूट देंगी। इसके अलावा वाहन निर्माता कंपनियां भी एक्स-शोरूम कीमतों पर लगभग 8 प्रतिशत तक की छूट उपलब्ध कराएंगी।
1.91 लाख ट्रक और 16 हजार से ज्यादा बसें होंगे प्रभावित
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार इस योजना का लाभ दिल्ली-एनसीआर के करीब 1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसों के मालिकों को मिलेगा।
वाहन मालिकों को यह विकल्प भी दिया जाएगा कि वे पुराने वाहनों को स्क्रैप कर सकते हैं या उन राज्यों में बेच सकते हैं जहां पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लागू नहीं है।
प्रदूषण में वाहनों की बड़ी हिस्सेदारी
सरकार के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत से अधिक है, जबकि कुल वाहनों में ऐसे पुराने वाहनों की संख्या मात्र 3 प्रतिशत है।
बीएस-4 वाहनों की तुलना में बीएस-6 वाहन 2.7 गुना कम प्रदूषण फैलाते हैं, ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
9585 करोड़ की योजना, डिजिटल सिस्टम से निगरानी
इस पूरी योजना के लिए लगभग 9585 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इसमें केंद्र सरकार 5041 करोड़ रुपये देगी, राज्य सरकारें टैक्स छूट के रूप में 1601 करोड़ रुपये देंगी, जबकि वाहन निर्माता कंपनियां लगभग 2943 करोड़ रुपये की छूट प्रदान करेंगी।
पूरी योजना को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लागू किया जाएगा। इसके लिए एकीकृत पोर्टल बनाया जाएगा, जहां पात्रता जांच, सब्सिडी प्रक्रिया, ईंधन वाउचर और प्रदूषण में कमी की निगरानी की जाएगी।
5 साल तक मिलेगा लाभ, होगी सख्त निगरानी
नए वाहनों के पंजीकरण के बाद अगले पांच वर्षों तक केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी और अन्य लाभ जारी रहेंगे।
योजना की निगरानी के लिए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी, जिसमें कई मंत्रालयों और एनसीआर राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। जिला स्तर पर डीएम को इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी जाएगी।