कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में नेतृत्व परिवर्तन ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है। पार्टी से जुड़ी जानकारी के अनुसार ज्योतिप्रकाश चटर्जी को एनसीपीआई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
इससे एक दिन पहले पार्टी की संस्थापक शिवली कुंडू ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि टीएमसी बागी गुट की प्रमुख सदस्य काकोली घोष दस्तीदार पार्टी की कमान संभाल सकती हैं, लेकिन उन्होंने इन अटकलों को खारिज कर दिया।
मंगलवार को मीडिया से बातचीत में काकोली घोष दस्तीदार ने स्पष्ट किया कि ज्योतिप्रकाश चटर्जी ही पार्टी के नए अध्यक्ष होंगे। हालांकि, इस नियुक्ति को लेकर संगठन के भीतर ही भ्रम की स्थिति भी सामने आई है।
पार्टी के कथित राष्ट्रीय संगठन महासचिव शांतनु डे ने दावा किया कि उन्हें नए अध्यक्ष के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदरूनी फैसलों को लेकर पारदर्शिता नहीं है और कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी स्थिति से अनजान हैं। शांतनु डे के अनुसार, संगठनात्मक गतिविधियों में उन्हें पूरी तरह से अलग रखा जा रहा है, जिससे असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
गौरतलब है कि नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया एक अपेक्षाकृत नई राजनीतिक पार्टी है, जिसे जनवरी 2023 में चुनाव आयोग में पंजीकृत किया गया था। पार्टी का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के सांकराइल क्षेत्र में दर्ज है।
2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने सीमित उपस्थिति दर्ज कराई थी। चार उम्मीदवारों के साथ मैदान में उतरी इस पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा, जहां उम्मीदवारों को बेहद कम वोट मिले और एक उम्मीदवार का नामांकन भी रद्द हो गया था।
वित्तीय स्थिति की बात करें तो चुनाव आयोग को सौंपे गए ऑडिट रिकॉर्ड के अनुसार पार्टी के पास सीमित संसाधन हैं और चुनावी खर्च के बाद इसके पास नगण्य नकदी शेष रह गई थी।
टीएमसी बागी गुट के एनसीपीआई से जुड़ाव के बाद यह छोटी पार्टी अब अचानक राष्ट्रीय चर्चा में आ गई है। हालांकि, नेतृत्व और संगठनात्मक पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों ने इसके भविष्य और राजनीतिक भूमिका पर अनिश्चितता भी पैदा कर दी है।