कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के बागी विधायक नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने सोमवार को बड़ा कदम उठाते हुए ममता बनर्जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाने और अभिषेक बनर्जी को पार्टी से निलंबित करने का दावा किया है। इसके साथ ही इस गुट ने खुद को "असली टीएमसी" बताते हुए नए संगठनात्मक ढांचे का भी एलान किया।
होटल में हुई बैठक, 60 विधायकों और 70 पार्षदों के शामिल होने का दावा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, न्यू टाउन स्थित एक होटल में बागी गुट की बैठक आयोजित की गई। ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि इस बैठक में पार्टी के 60 विधायक और कोलकाता नगर निगम के 70 पार्षद शामिल हुए। बैठक में हावड़ा मध्य से विधायक अरूप रॉय को सर्वसम्मति से पार्टी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया।
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यह लड़ाई असली और नकली टीएमसी की नहीं, बल्कि पार्टी के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने की है। उन्होंने कहा कि बैठक के फैसलों की जानकारी जल्द ही चुनाव आयोग को दी जाएगी।
संगठन में संवैधानिक संकट का आरोप
बागी गुट का आरोप है कि टीएमसी में लंबे समय से संगठनात्मक नियमों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि पार्टी के संविधान के अनुसार हर तीन वर्ष में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का पुनर्गठन होना चाहिए, लेकिन फरवरी 2022 के बाद ऐसा नहीं किया गया।
ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद संगठन का नवीनीकरण नहीं किया गया, जिससे पार्टी में संवैधानिक संकट पैदा हो गया। इसी वजह से नए नेतृत्व के गठन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
ममता गुट ने पहले ही कर दिया था निष्कासित
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया था। अब बागी गुट ने जवाबी कदम उठाते हुए समानांतर संगठन का ऐलान कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम के बाद टीएमसी के भीतर तीन अलग-अलग शक्ति केंद्र उभरते दिखाई दे रहे हैं। एक ओर ममता बनर्जी का आधिकारिक गुट है, दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी का बागी गुट है, जबकि तीसरे मोर्चे के रूप में कुछ सांसदों के अलग राजनीतिक रुख अपनाने की चर्चा है।
चुनाव चिह्न और पार्टी फंड पर बढ़ सकता है विवाद
बागी गुट ने संकेत दिए हैं कि वह पार्टी के चुनाव चिह्न पर भी दावा कर सकता है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी की बात कही जा रही है। वहीं, पार्टी फंड को लेकर भी विवाद गहराता दिख रहा है।
इस बीच टीएमसी ने अपने तीन बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। पार्टी ने अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि खातों को किस आधार पर और किसके निर्देश पर फ्रीज किया गया।
440 करोड़ रुपये वाले खातों पर विवाद
जानकारी के मुताबिक, जिन तीन खातों को फ्रीज किया गया है, उनमें करीब 440 करोड़ रुपये जमा हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने एक निजी बैंक को पत्र लिखकर खातों को अस्थायी रूप से फ्रीज करने का अनुरोध किया।
अरूप बिस्वास का कहना था कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और वित्तीय अधिकारों को लेकर असमंजस की स्थिति है। हालांकि, टीएमसी नेतृत्व ने बाद में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।
बागी गुट का आरोप है कि पार्टी के वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पार्टी फंड में जमा धन का स्रोत क्या है।
टीएमसी में बढ़ती यह अंदरूनी लड़ाई अब केवल संगठन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि चुनाव चिह्न, नेतृत्व और करोड़ों रुपये के पार्टी फंड को लेकर कानूनी और राजनीतिक संघर्ष का रूप लेती नजर आ रही है।