हिमाचल में 3,000 करोड़ की स्वास्थ्य आधुनिकीकरण योजना की शुरुआत

शिमला: राज्य सरकार ने 3,000 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य आधुनिकीकरण योजना के पहले चरण को मंजूरी दे दी है, जिसमें 1,617 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यह परियोजना 1 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2031 तक लागू होगी और इसका उद्देश्य राज्य भर में स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस करना है।
पहले चरण में मेडिकल कॉलेजों में नए भवनों का निर्माण, शैक्षणिक ब्लॉकों का नवीनीकरण और बाह्य व आंतरिक रोगी सुविधाओं का उन्नयन किया जाएगा। इस दौरान उच्चस्तरीय डायग्नोस्टिक उपकरण, एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें, सिमुलेशन आधारित मेडिकल प्रशिक्षण प्रणाली और एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफ़ॉर्म स्थापित किए जाएंगे। साथ ही एआर/वीआर आधारित प्रशिक्षण केंद्र, डिजिटल पुस्तकालय और ई-लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म के साथ स्किल लैब भी विकसित की जाएगी।
दूसरे चरण में आईजीएमसी, एआईएमएसएस चमियाना और मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में उपचार केंद्रों को और मजबूत किया जाएगा। इस चरण में रीनल और बोन मैरो ट्रांसप्लांट, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, उन्नत एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं, बाल चिकित्सा सेवाएं और रोबोटिक-सहायता प्राप्त सर्जरी जैसी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। संस्थानों में ओ-आर्म 3डी इमेजिंग, न्यूरो-नेविगेशन सिस्टम और एकीकृत क्रिटिकल केयर मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीक भी लगाई जाएगी। इसके साथ एक उन्नत बाल चिकित्सा देखभाल एवं नवाचार केंद्र भी स्थापित किया जाएगा, जो क्रिटिकल, सर्जिकल और टेली-सक्षम बाल चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत करेगा।
तीसरे चरण में आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों को आधुनिक डायग्नोस्टिक और सर्जिकल सुविधाओं जैसे सीटी स्कैनर, मोबाइल एक्स-रे यूनिट, अल्ट्रासाउंड मशीनें, लैप्रोस्कोपिक सिस्टम और नेत्र शल्य चिकित्सा इकाइयों से सुसज्जित किया जाएगा। इसके साथ ही टेलीमेडिसिन सेवाओं और डिजिटल रेफरल नेटवर्क का विस्तार कर जिला अस्पतालों को तृतीयक और सुपर स्पेशियलिटी केंद्रों से जोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस करने के लिए 3,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिवर्ष लगभग 9.5 लाख मरीज हिमाचल प्रदेश से बाहर इलाज के लिए जाते हैं, जिससे राज्य की जीडीपी को लगभग 1,350 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है।
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