फेफड़ों की गंभीर बीमारी के बावजूद कांवड़ यात्रा पर निकले 60 वर्षीय परशुराम, साथ रखे दो ऑक्सीजन सिलेंडर

HIGHLIGHTS
- परशुराम ने स्कूटी से हरिद्वार से मुजफ्फरनगर तक की यात्रा की।
- पुरा महादेव मंदिर में जल चढ़ाने का संकल्प रास्ते की चढ़ाई के कारण बदला।
- मुजफ्फरनगर के शिव चौक पर जलाभिषेक करने का फैसला किया।
मुजफ्फरनगर। सोमवार सुबह कांवड़ यात्रा के दौरान मुजफ्फरनगर में आस्था और हौसले की अलग तस्वीर देखने को मिली। 60 वर्षीय परशुराम शर्मा फेफड़ों की गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर पहुंचे। वह करीब दो वर्षों से ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं और यात्रा के दौरान अपने साथ दो ऑक्सीजन सिलेंडर भी लेकर चल रहे हैं।
मुजफ्फरनगर के नरा गांव के मूल निवासी परशुराम फिलहाल हरिद्वार में रहते हैं। उन्होंने बताया कि बीमारी के बावजूद इस बार उन्होंने भगवान भोलेनाथ को कांवड़ चढ़ाने का संकल्प लिया। इसके बाद हरिद्वार से गंगाजल लेकर स्कूटी से मुजफ्फरनगर के लिए रवाना हुए।
दो साल से ऑक्सीजन पर, फिर भी यात्रा का लिया संकल्प
परशुराम के मुताबिक, उन्हें करीब दो साल से लगातार ऑक्सीजन की जरूरत है। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहते हैं और कुछ समय के लिए भी ऑक्सीजन हटाना उनके लिए संभव नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने आस्था को प्राथमिकता देते हुए कांवड़ यात्रा शुरू की। यात्रा के दौरान जरूरत पड़ने पर तत्काल ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए उनके साथ दो ऑक्सीजन सिलेंडर रखे गए हैं।
पुरा महादेव नहीं जा सके, शिव चौक पर करेंगे जलाभिषेक
परशुराम का मूल संकल्प बागपत के पुरा महादेव मंदिर में गंगाजल चढ़ाने का था। लेकिन मंदिर तक जाने वाले रास्ते में अधिक चढ़ाई होने के कारण ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ वहां पहुंचना उनके लिए कठिन है।
मुजफ्फरनगर पहुंचने के बाद उन्होंने अब शिव चौक पर ही भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि उनका संकल्प भगवान की भक्ति से जुड़ा है और स्थान बदलने से उनकी आस्था कम नहीं होगी।
क्रांति सेना के शिविर में भोजन और ठहरने की व्यवस्था
मुजफ्फरनगर पहुंचने के बाद परशुराम आनंद भवन स्थित क्रांति सेना के शिविर में पहुंचे। यहां क्रांति सेना महिला मोर्चा की अध्यक्ष पूनम चौधरी ने उनकी स्थिति के बारे में जानकारी ली और उन्हें भोजन कराया। शिविर में उनके ठहरने की व्यवस्था भी की गई।
पूनम चौधरी ने बताया कि शिविर में आने वाले कांवड़ियों की सेवा के लिए 24 घंटे व्यवस्था उपलब्ध है। परशुराम ने बताया कि वह पहले भी कई बार कांवड़ यात्रा कर चुके हैं, लेकिन इस बार की यात्रा उनके लिए खास है।
उन्होंने कहा कि बीमारी और परेशानियां जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन व्यक्ति को सकारात्मक सोच और मजबूत मन के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए। उनका कहना है कि वह अपनी यात्रा के माध्यम से लोगों को बीमारी के बावजूद सकारात्मक सोच रखने और आस्था बनाए रखने का संदेश देना चाहते हैं।
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