बांग्लादेशी-रोहिंग्या घुसपैठ सिंडिकेट पर ED का बड़ा खुलासा, विदेशी फंडिंग से चल रहा था नेटवर्क

HIGHLIGHTS
- ED की छापेमारी में बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को घुसपैठ कराने वाले कथित सिंडिकेट से जुड़े कई अहम दस्तावेज मिले हैं।
- जांच में विदेशी फंडिंग लेने वाले कुछ एनजीओ और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी सामने आई है।
- ED अब फंडिंग नेटवर्क, बैंक खातों और घुसपैठियों को बसाने में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को भारत में अवैध तरीके से प्रवेश कराने और उनके लिए फर्जी नागरिकता दस्तावेज तैयार कराने वाले सिंडिकेट के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। ईडी की जांच में पता चला है कि एटीएस की कार्रवाई के बाद भी पश्चिम बंगाल में यह अवैध गतिविधियां जारी थीं।
जांच में यह भी सामने आया है कि जिन एनजीओ को विदेशों से फंडिंग मिल रही थी, उन्होंने करोड़ों रुपये अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिए थे, ताकि जांच एजेंसियों की नजर से बचाया जा सके।
विदेशों से लगातार मिल रही थी एनजीओ को फंडिंग
ईडी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में 17 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें कई एनजीओ के ठिकाने भी शामिल थे। जांच के दौरान एजेंसी को कई आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं, जिनकी जांच में सामने आया कि तमाम निगरानी के बावजूद कुछ एनजीओ को विदेशों से फंडिंग मिल रही थी।
इसी आधार पर ईडी अब इस मामले में आगे बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य घुसपैठियों को बसाने, मदरसों और मस्जिदों के निर्माण के लिए इस्तेमाल की जा रही विदेशी फंडिंग को रोकना है।
ईडी जल्द उन बैंकों से भी जानकारी मांगेगी, जहां एनजीओ के एफसीआरए खातों के जरिए विदेशी धन पहुंच रहा था। इसके अलावा उन छोटे बैंकों पर भी कार्रवाई की तैयारी है, जो बिना केवाईसी प्रक्रिया पूरी किए घुसपैठियों के खाते खोल रहे थे।
यूपी में भी फैला हुआ है नेटवर्क
बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के नेटवर्क की जड़ें उत्तर प्रदेश में भी गहरी बताई जा रही हैं। खासतौर पर सहारनपुर का देवबंद इनके लिए एक प्रमुख ठिकाना बना है।
पिछले पांच वर्षों में एटीएस ने घुसपैठियों से जुड़े तीन मॉड्यूल के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें से एक मॉड्यूल के 15 सदस्यों को हाल ही में राजधानी की अदालत ने सजा सुनाई थी।
वहीं, राज्य सरकार ने भी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने के लिए डिटेंशन सेंटर बनाने की योजना तैयार की थी।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.

Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.