प्रतिस्पर्धा-विरोधी आरोपों पर CCI का फैसला, रिलायंस जियो समेत 4,500 कंपनियों को राहत

HIGHLIGHTS
- CCI ने रिलायंस जियो समेत 4,500 से ज्यादा कंपनियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा-विरोधी शिकायत खारिज कर दी।
- आयोग ने कहा कि आरोपों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किए गए।
- CCI के अनुसार, कंपनियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया धारा 3 और 4 के उल्लंघन का मामला नहीं बनता।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड और 4,500 से अधिक अन्य कंपनियों के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज कर दिया है। आयोग ने कहा कि कंपनियों पर लगाए गए प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों के आरोप सामान्य, अनुमान आधारित और किसी ठोस सबूत के बिना थे।
CCI ने यह आदेश गुरुवार, 17 जुलाई 2026 को जारी किया। इस फैसले से दूरसंचार, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा, एफएमसीजी और स्वास्थ्य सेवा सहित कई क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों को राहत मिली है।
शिकायतकर्ता ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 3 और 4 के उल्लंघन का आरोप लगाया था। ये धाराएं प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौतों और किसी कंपनी की प्रमुख स्थिति के गलत इस्तेमाल से संबंधित हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दूरसंचार, लॉजिस्टिक्स, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) खरीद, ऊर्जा, एफएमसीजी और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों की कंपनियां आपसी तालमेल के साथ काम कर रही थीं। इसमें कीमतों में समानता और प्रतिस्पर्धा को सीमित करने जैसी गतिविधियों का आरोप लगाया गया था।
साथ ही शिकायतकर्ता ने माल ढुलाई और आपूर्ति-शृंखला लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने की बात कही थी। उसने महानिदेशक (DG) से विस्तृत जांच कराने की मांग भी की थी।
हालांकि, CCI ने पाया कि शिकायतकर्ता संबंधित कंपनियों की किसी विशेष भूमिका को स्पष्ट रूप से सामने नहीं रख सका और अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सामग्री भी उपलब्ध नहीं करा पाया।
शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए थे?
शिकायतकर्ता का आरोप था कि कंपनियों ने आपस में मिलकर कीमतों को समान बनाए रखा और प्रतिस्पर्धा को रोकने की कोशिश की। माल ढुलाई और सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स में भी इसी तरह की गतिविधियों का आरोप लगाया गया था।
लेकिन CCI ने कहा कि शिकायत के साथ कोई दस्तावेजी प्रमाण पेश नहीं किए गए। इनमें माल ढुलाई के कोटेशन, बिल, बोली से जुड़े दस्तावेज या कंपनियों के बीच किसी तरह के पत्राचार जैसे सबूत शामिल नहीं थे।
आयोग के अनुसार, ऐसे दस्तावेज ही कथित मिलीभगत या समन्वित गतिविधियों के दावों को साबित करने में मदद कर सकते थे।
दूरसंचार और GeM खरीद से जुड़े आरोपों पर क्या कहा?
दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े आरोपों पर CCI ने कहा कि किसी अल्पाधिकार वाले बाजार में प्रीपेड प्लान, वैधता अवधि या रिचार्ज कीमतों में समानता होना अपने आप में प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौते का प्रमाण नहीं है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल समानता के आधार पर कंपनियों के बीच किसी गलत समझौते का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
वहीं, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) खरीद से जुड़े आरोपों पर आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता ने न तो बोली में हेराफेरी करने वाली कथित कंपनियों की पहचान की और न ही ऐसा कोई सबूत दिया जिससे समन्वय, सूचना साझा करने या बोली रोटेशन जैसी गतिविधियों का संकेत मिलता हो।
CCI ने इन आरोपों को भी आधारहीन माना।
CCI ने शिकायत क्यों खारिज की?
CCI ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत में जरूरी बुनियादी तथ्यों की कमी थी। आयोग ने माना कि लगाए गए आरोप अस्पष्ट थे और इनके आधार पर विस्तृत जांच शुरू करने का कोई आधार नहीं बनता।
नियामक ने निष्कर्ष निकाला कि रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड और अन्य कंपनियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 3 और 4 के उल्लंघन का प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है।
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