यूपी में बाढ़ से हालात गंभीर, सरयू-गंगा के उफान से कई गांव प्रभावित

HIGHLIGHTS
- अयोध्या में सरयू नदी खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
- बाराबंकी के एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 23 सेंटीमीटर अधिक दर्ज हुआ।
- रामनगर, हैदरगढ़, नवाबगंज और सिरौलीगौसपुर में जलभराव बढ़ गया है।
लखनऊ। अवध समेत उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़ और बारिश का दौर लगातार जारी है। सरयू नदी के उफान के चलते कई जिलों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। वहीं लखीमपुर में शारदा नदी का जलस्तर कम होने के बावजूद यह अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
अवध, कानपुर और वाराणसी मंडल के दर्जनों गांवों का सड़क संपर्क कट गया है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर घटने के बाद रामघाट समेत अन्य तीर्थ क्षेत्रों में सफाई का काम शुरू कर दिया गया है।
अयोध्या में सरयू नदी खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। यहां बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत सामग्री बांटी जा रही है। बाराबंकी के एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 23 सेंटीमीटर अधिक दर्ज किया गया है। इसके कारण तटवर्ती दो दर्जन गांवों में तीसरी बार पानी घुस गया है।
मूसलाधार बारिश से रामनगर, हैदरगढ़, नवाबगंज और सिरौलीगौसपुर इलाकों में जलभराव की परेशानी और बढ़ गई है। कई गांवों के लोग तटबंधों पर तिरपाल डालकर रहने को मजबूर हैं। अंबेडकरनगर में भी सरयू खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है और आलापुर व टांडा के 34 गांव बाढ़ से घिरे हुए हैं। मऊ और आजमगढ़ में भी सरयू का रुख आक्रामक बना हुआ है।
लखीमपुर जिले में बनबसा बैराज से पानी का डिस्चार्ज कम होने के बाद शारदा नदी का जलस्तर 25 सेंटीमीटर घटा है। हालांकि, इसके बावजूद नदी अभी खतरे के निशान से एक सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
तिकुनिया-खैरटिया में मोहाना नदी का तेज बहाव बांध के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। निघासन, फूलबेहड़ और ईसानगर के दर्जनों गांवों में नावें ही आने-जाने का एकमात्र साधन रह गई हैं। इससे फसलों और पशु चारे का संकट भी गंभीर हो गया है।
कानपुर और आसपास के जिलों में गंगा और बेतवा नदियां भी परेशानी बढ़ा रही हैं। फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण 62 गांव फिर से पानी से घिर गए हैं। तेजी से हो रहे कटान की वजह से कई मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
उरई में बांधों से पानी छोड़े जाने के चलते बेतवा का जलस्तर बढ़ा है। वहीं महोबा में 150 से अधिक गांवों का संपर्क अभी भी टूटा हुआ है। पूर्वांचल के जिलों में गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन लोगों की परेशानियां अब भी बनी हुई हैं।
वाराणसी में गंगा के जलस्तर में छह सेंटीमीटर की कमी आई है। इसके बावजूद सभी घाट जलमग्न हैं और नाविकों व दुकानदारों का काम ठप पड़ा है। वरुणा के उफान के कारण सारनाथ क्षेत्र के दर्जनों घरों में पानी भर गया है और एक हजार से अधिक लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं।
गाजीपुर में गंगा अब भी खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बलिया, मीरजापुर और भदोही में जलस्तर घटने से राहत की उम्मीद जगी है, हालांकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की दुश्वारियां अभी भी बनी हुई हैं।
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