परिसीमन से लेकर वन नेशन-वन इलेक्शन तक, कांग्रेस ने तय किया विरोध का एजेंडा

HIGHLIGHTS
- मानसून सत्र से पहले कांग्रेस का बड़ा ऐलान, पार्टी ने कहा कि सरकार द्वारा लाए जाने वाले कई प्रमुख विधेयकों का संसद में विरोध किया जाएगा।
- परिसीमन विधेयक, वन नेशन-वन इलेक्शन और न्यायाधीशों से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक समेत कई प्रस्तावों पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है।
- एफसीआरए संशोधन और खाद्य सुरक्षा कानून में बदलाव जैसे प्रस्तावों का भी विरोध करने की बात कहते हुए कांग्रेस ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर रणनीति बनाने के संकेत दिए हैं।
कांग्रेस ने संकेत दिया है कि संसद के आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले कई अहम विधेयकों का वह खुलकर विरोध करेगी। पार्टी का कहना है कि इन मुद्दों पर वह अन्य विपक्षी दलों के साथ समन्वय बनाकर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाएगी।
गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि पार्टी की बैठक में संभावित विधेयकों और संसदीय रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि जिन प्रस्तावों को लेकर पार्टी को गंभीर आपत्तियां हैं, उनके खिलाफ संसद के भीतर और बाहर आवाज उठाई जाएगी।
परिसीमन विधेयक पर फिर जताई आपत्ति
जयराम रमेश ने दावा किया कि केंद्र सरकार परिसीमन से जुड़े विधेयक को दोबारा संसद में लाने की तैयारी कर रही है। उनके अनुसार, पहले भी इस मुद्दे पर सरकार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया था। कांग्रेस का मानना है कि यह विषय व्यापक राजनीतिक और संवैधानिक प्रभाव वाला है, इसलिए पार्टी इसका विरोध जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच एकजुटता बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।
न्यायाधीशों से जुड़े संविधान संशोधन पर भी असहमति
कांग्रेस ने न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया से संबंधित प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक पर भी आपत्ति जताई है। रमेश ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया है और कांग्रेस इस विधेयक का भी विरोध करेगी।
'वन नेशन, वन इलेक्शन' प्रस्ताव पर भी विरोध
पार्टी ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ योजना को लेकर भी अपनी असहमति दोहराई। जयराम रमेश ने कहा कि इस विषय पर गठित जेपीसी की रिपोर्ट अगस्त में आने की संभावना है, लेकिन कांग्रेस का रुख पहले की तरह इसके खिलाफ बना हुआ है।
शिक्षा और एफसीआरए से जुड़े प्रस्तावों पर भी सवाल
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार मानसून सत्र में ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ पेश करती है, तो उसका भी विरोध किया जाएगा। इसके अलावा विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) में संशोधन से जुड़े किसी नए प्रस्ताव का भी पार्टी विरोध करेगी। रमेश ने कहा कि पूर्व में भी कांग्रेस के विरोध के बाद सरकार को ऐसा प्रस्ताव वापस लेना पड़ा था।
खाद्य सुरक्षा कानून में बदलाव का भी विरोध
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में संभावित संशोधनों को लेकर भी कांग्रेस ने चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि यह कानून करोड़ों लोगों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने वाली योजनाओं का आधार है। ऐसे में इसमें किसी भी प्रकार के बदलाव को लेकर कांग्रेस सतर्क है और आवश्यकता पड़ने पर इसका विरोध करेगी।
कांग्रेस का कहना है कि फिलहाल सरकार के विधायी एजेंडे में ऐसा कोई बड़ा प्रस्ताव नजर नहीं आ रहा, जिसे पार्टी समर्थन देने की स्थिति में हो। इसलिए आगामी मानसून सत्र में कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
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