रामपुर: जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर RDA की बड़ी कार्रवाई, ध्वस्तीकरण के आदेश जारी

HIGHLIGHTS
- रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को बिना अनुमति निर्मित मानते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए हैं।
- आरडीए का कहना है कि विश्वविद्यालय ने दो भवनों के लिए अनुमति ली थी, जिससे साबित होता है कि प्रबंधन को निर्माण स्वीकृति के नियमों की जानकारी थी।
- कार्रवाई के बाद छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ी है, जबकि विश्वविद्यालय के पास हाईकोर्ट जाने या निर्माण वैध कराने का विकल्प मौजूद है।
रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण को लेकर चल रहे विवाद में रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने बड़ा फैसला लिया है। प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय परिसर में बने 38 भवनों को बिना जरूरी अनुमति के निर्मित मानते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए हैं। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की दलीलों को आरडीए ने स्वीकार नहीं किया।
आरडीए के आदेश के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रबंधन ने दो भवनों के निर्माण के लिए जिला पंचायत से अनुमति ली थी। प्राधिकरण का कहना है कि इससे स्पष्ट होता है कि प्रबंधन को निर्माण से पहले सक्षम संस्था से स्वीकृति लेने की जानकारी थी। इसके बावजूद बाकी 38 भवन बिना मानचित्र स्वीकृति के बनाए गए, जिसे नियमों का उल्लंघन माना गया है।
आरडीए ने विश्वविद्यालय के तर्कों को नहीं माना
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से सुनवाई के दौरान दावा किया गया था कि जिस क्षेत्र में विश्वविद्यालय बना है, वह पहले आरडीए के विकास क्षेत्र में शामिल नहीं था। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि निर्माण पुराने हैं, इसलिए मौजूदा नियमों के आधार पर उन्हें अवैध नहीं माना जा सकता।
हालांकि, आरडीए ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि निर्माण की वैधता उस समय लागू कानून और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के आधार पर तय होती है। प्राधिकरण के मुताबिक, दो भवनों के नक्शे पास होने से यह साबित होता है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को अनुमति प्रक्रिया की जानकारी थी।
20 दिन में खुद हटाने का आदेश
आरडीए ने उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के तहत कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि वह 20 दिनों के भीतर इन निर्माणों को स्वयं हटा ले। ऐसा नहीं करने पर प्राधिकरण अपने स्तर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। कार्रवाई पर होने वाला खर्च भी नियमानुसार वसूल किया जाएगा।
हाईकोर्ट जाने पर आरडीए रखेगा अपना पक्ष
ध्वस्तीकरण आदेश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के पास हाईकोर्ट जाने या निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्माण को वैध कराने का विकल्प मौजूद है। हालांकि, आरडीए ने पहले ही हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है, जिसके चलते किसी भी याचिका पर प्राधिकरण का पक्ष सुने बिना आदेश पारित नहीं किया जा सकेगा।
आरडीए ने 28 जून को 38 भवनों को लेकर नोटिस जारी किया था और विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा था। व्यक्तिगत सुनवाई के बाद प्राधिकरण ने जवाब और तर्कों का परीक्षण करते हुए यह आदेश जारी किया।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
जौहर विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले करीब 2500 से अधिक छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। छात्रों को आशंका है कि यदि शैक्षणिक भवनों पर कार्रवाई होती है तो कक्षाएं, परीक्षाएं और अन्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था करने की मांग की है।
जौहर विश्वविद्यालय विवाद में आगे की कार्रवाई पर नजर
मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय रामपुर में मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट द्वारा संचालित निजी विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी और इसके चांसलर सपा नेता आजम खां हैं। विश्वविद्यालय परिसर करीब 300 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां विभिन्न स्नातक, परास्नातक और व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। अब सभी की नजर आरडीए की आगे की कार्रवाई और विश्वविद्यालय की कानूनी प्रक्रिया पर है।
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