हरियाणा के बाद हेरिटेज और पर्वतीय रेल मार्गों पर चलेंगी 35 हाइड्रोजन ट्रेनें

HIGHLIGHTS
- 17 जुलाई को जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाएंगे।
- जींद-सोनीपत रूट पर चलने वाली ट्रेन 10 कोच और 1,200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम से लैस होगी।
- भारत हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाले जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद दुनिया का पांचवां प्रमुख देश बनेगा।
चंडीगढ़। भारतीय रेलवे के लिए 17 जुलाई का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। इसके साथ ही भारत स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल रेल तकनीक अपनाने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा।
इसी कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से तैयार किए गए जींद और नरवाना रेलवे स्टेशनों का भी उद्घाटन करेंगे।
नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में रेलवे का बड़ा कदम
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को केवल एक नई रेल सेवा नहीं, बल्कि रेलवे के हरित परिवहन अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है। इसी दिशा में भारतीय रेलवे ने ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ योजना शुरू की है, जिसके तहत आने वाले समय में देश के ऐतिहासिक और पहाड़ी रेल मार्गों पर हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।
इस योजना के तहत कुल 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की तैयारी है। जींद से शुरू होने वाली ट्रेन इस अभियान की पहली महत्वपूर्ण कड़ी होगी।
जींद-सोनीपत रूट पर दौड़ेगी 10 कोच वाली ट्रेन
पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद-सोनीपत रेलखंड पर संचालित होगी। यह ट्रेन 10 कोच की होगी और इसमें करीब 2,638 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी।
ट्रेन में 1,200 किलोवाट क्षमता का हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम लगाया गया है। यह ट्रेन 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है और करीब 89 किलोमीटर की दूरी लगभग दो घंटे में तय करेगी।
शुरुआत में इसका संचालन सप्ताह में छह दिन किया जाएगा। रविवार को ट्रेन का रखरखाव किया जाएगा। भविष्य में इसे रोजाना दो फेरे चलाने की योजना भी बनाई गई है।
यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं
हाइड्रोजन ट्रेन में यात्रियों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इसमें आरामदायक सीटों के अलावा मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट, पंखे, खड़े यात्रियों के लिए हैंडग्रिप और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
इस ट्रेन का निर्माण चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी में किया गया है। इसके संचालन के लिए लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्डों को चेन्नई तथा गुजरात में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
इन ऐतिहासिक रेल मार्गों पर भी चलाने की तैयारी
रेलवे की ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ योजना के तहत भविष्य में कई प्रसिद्ध रेल मार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की योजना है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- कालका-शिमला रेलवे
- दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे
- नीलगिरी माउंटेन रेलवे
- कांगड़ा वैली रेलवे
- माथेरान हिल रेलवे
प्रत्येक हाइड्रोजन ट्रेन तैयार करने में करीब 80 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और रिफ्यूलिंग व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रत्येक रूट पर लगभग 70 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद भारत भी शामिल
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में डीजल की जगह हाइड्रोजन का इस्तेमाल कर बिजली तैयार की जाती है। इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता, जबकि उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है।
इस उपलब्धि के बाद भारत हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाले दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनमें जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन पहले से शामिल हैं।
हरियाणा के लिए गौरव का अवसर
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि देश आधुनिक और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन हरियाणा से शुरू होना राज्य के लिए गौरव की बात है।
सरकार का मानना है कि यह परियोजना हरित ऊर्जा और आधुनिक तकनीक आधारित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देगी तथा हरियाणा को भविष्य की रेल तकनीक के केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।
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