स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली की सुरक्षा हाईटेक, AI कैमरों से होगी हर गतिविधि पर नजर

HIGHLIGHTS
- स्वतंत्रता दिवस सुरक्षा में पहली बार बड़े स्तर पर AI आधारित कैमरों का इस्तेमाल होगा।
- 1200 से ज्यादा कैमरों से संदिग्ध चेहरों, वाहनों और भीड़ पर रखी जाएगी नजर।
- AI सिस्टम लावारिस वस्तुओं और प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसपैठ पर तुरंत अलर्ट देगा।
स्वतंत्रता दिवस समारोह की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए दिल्ली पुलिस इस बार नई तकनीक का सहारा लेने जा रही है। पहली बार बड़े स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वीडियो एनालिटिक्स सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रख सकेंगी।
दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में 1200 से ज्यादा आईपी आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनमें एआई फीचर्स भी शामिल होंगे। इन कैमरों की मदद से संदिग्ध चेहरों की पहचान, वाहनों की नंबर प्लेट की जांच, भीड़ की निगरानी, लावारिस सामान का पता लगाने और प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसपैठ की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंच सकेगी।
इन इलाकों में लगाए जाएंगे कैमरे
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था के लिए उत्तरी, मध्य, उत्तर-पश्चिम और नई दिल्ली जिले के अलावा सुरक्षा इकाई के अंतर्गत अस्थायी कैमरे लगाए जाएंगे।
सबसे ज्यादा कैमरे उत्तरी जिले में लगाए जाएंगे, जहां 560 कैमरों की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा मध्य जिले में 354, नई दिल्ली जिले में 120, उत्तर-पश्चिम जिले में 96 और सुरक्षा इकाई के लिए 85 कैमरे लगाए जाएंगे।
इन कैमरों में जरूरत के अनुसार अलग-अलग एआई आधारित निगरानी फीचर सक्रिय किए जाएंगे।
फेशियल रिकॉग्निशन से होगी संदिग्धों की पहचान
स्वतंत्रता दिवस सुरक्षा योजना में फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम को सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। इसकी मदद से संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करना आसान होगा।
इसके अलावा ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) तकनीक से वाहनों की निगरानी की जाएगी। अगर किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई संदिग्ध बैग या लावारिस वस्तु मिलती है तो एबैंडन्ड ऑब्जेक्ट डिटेक्शन सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा।
वहीं, ट्रिप वायर और परिमीटर इंट्रूजन डिटेक्शन तकनीक से प्रतिबंधित क्षेत्रों में किसी भी अनधिकृत प्रवेश की जानकारी सुरक्षा कर्मियों को तत्काल मिल जाएगी।
भीड़ प्रबंधन में भी मदद करेंगे AI कैमरे
दिल्ली पुलिस के अनुसार, पीपल काउंटिंग तकनीक के जरिए किसी स्थान पर मौजूद लोगों की संख्या का वास्तविक समय में अनुमान लगाया जा सकेगा। इससे भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा योजना बनाने में मदद मिलेगी।
सभी कैमरों को एसटीक्यूसी प्रमाणित होना अनिवार्य होगा और इन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साइबर सुरक्षा मानकों के अनुरूप लगाया जाएगा। कुल कैमरों में करीब 80 प्रतिशत कैमरे 2 मेगापिक्सल और 20 प्रतिशत 4 मेगापिक्सल क्षमता वाले होंगे। उच्च क्षमता वाले कैमरे बेहद संवेदनशील और रणनीतिक स्थानों पर लगाए जाएंगे।
30 जुलाई से शुरू होगी कैमरों की तैनाती
दिल्ली पुलिस के अनुसार, अलग-अलग इलाकों में सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से कैमरों की तैनाती 30 जुलाई से 16 अगस्त के बीच की जाएगी।
इसका मुख्य उद्देश्य लाल किला क्षेत्र, वीवीआईपी रूट, भीड़भाड़ वाले इलाकों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर निगरानी व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाना है।
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