भारत में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की साजिश नाकाम, संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़

आंध्र प्रदेश पुलिस ने एक संदिग्ध आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है, जिसके तार विदेशी हैंडलर्स और अंतरराष्ट्रीय चरमपंथी संगठनों से जुड़े बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार यह समूह भारत में युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहा था।
इस मामले में पुलिस ने बिहार, दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और राजस्थान सहित कई राज्यों में छापेमारी की। इन राज्यों में संदिग्धों को पकड़ने के लिए विशेष टीमें भेजी गईं। अब तक करीब एक दर्जन लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें आंध्र प्रदेश के भी तीन लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
विदेशी संपर्क और ऑनलाइन प्रचार का आरोप
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क सोशल मीडिया के माध्यम से चरमपंथी विचारधारा का प्रचार कर रहा था। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, समूह के कुछ सदस्य विदेशी ऑपरेटिव्स के संपर्क में थे और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए जिहादी सामग्री साझा कर रहे थे।
खुफिया अधिकारियों के अनुसार यह मॉड्यूल कथित तौर पर आईएसआईएस और अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) जैसे संगठनों से जुड़े लोगों के संपर्क में था और युवाओं को प्रभावित करने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहा था।
मुख्य आरोपी पर नेटवर्क चलाने का आरोप
पुलिस ने रहमतुल्लाह शरीफ को इस नेटवर्क का प्रमुख चेहरा बताया है। आरोप है कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर सोशल मीडिया के जरिए विदेशी हैंडलर्स से संपर्क बनाए हुए था और युवाओं तक कट्टरपंथी सामग्री पहुंचा रहा था।
जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर कई विवादित और उग्रवादी विचारधारा से जुड़े वीडियो और भाषण भी साझा करते थे, जिनका उद्देश्य युवाओं को प्रभावित करना बताया जा रहा है।
कई देशों से जुड़े संपर्क
जांचकर्ताओं का दावा है कि इस नेटवर्क ने 40 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया और बांग्लादेश में मौजूद लोगों से संपर्क बनाया हुआ था। एजेंसियों को आशंका है कि इन संपर्कों के जरिए समूह को मार्गदर्शन और संभावित समर्थन मिल रहा था।
भारत में कट्टरपंथी गतिविधियों की योजना
जांच एजेंसियों के मुताबिक यह नेटवर्क कथित तौर पर भारत में एक कट्टरपंथी व्यवस्था स्थापित करने के विचार को बढ़ावा दे रहा था। कुछ विदेशी हैंडलर्स ने समूह को हथियारों के उपयोग और प्रशिक्षण से जुड़ी जानकारी भी दी थी।
पुलिस को यह भी संदेह है कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग विदेशों में प्रशिक्षण लेने की कोशिश कर रहे थे और साथ ही भारत में नए लोगों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा था।
महिला विंग और संदिग्ध गतिविधियां
जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क के जरिए महिलाओं को जोड़ने के लिए एक अलग “ख्वातीन विंग” बनाने की योजना थी। आरोपियों में शामिल सईदा बेगम के बारे में भी जानकारी मिली है कि वह कथित तौर पर पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर में सक्रिय कुछ लोगों के संपर्क में थी।
विस्फोटक सामग्री और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच
जांच एजेंसियां साइबर गतिविधियों, आईईडी बनाने से जुड़ी सामग्री और भारत विरोधी पोस्ट की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस के मुताबिक कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में हथियारों और विस्फोटक बनाने से संबंधित जानकारी साझा करने के संकेत भी मिले हैं।
फिलहाल एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस मॉड्यूल का विस्तार कितना बड़ा है और इसमें और कौन-कौन शामिल हो सकते हैं।
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