लाल किले से पीएम मोदी का युवाओं को सन्देश, बोले- हिंसा और अराजकता से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में दें योगदान

HIGHLIGHTS
- पीएम मोदी ने युवाओं की ऊर्जा को विकास की दिशा में लगाने पर जोर दिया।
- उन्होंने समाज को गलत दिशा में ले जाने वाले तत्वों की पहचान की अपील की।
- प्रधानमंत्री ने कहा कि हथियारबंद नक्सलियों की ताकत लगभग खत्म हो चुकी है।
नई दिल्ली। देशभर में आज 80वां स्वतंत्रता दिवस उल्लास, राष्ट्रीय स्वाभिमान और देशभक्ति के माहौल में मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक समारोह का नेतृत्व करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्रध्वज फहराया।
राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने समाज में हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने वाली मानसिकता के खिलाफ सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए तरह-तरह के दांव चल रहे हैं और ऐसे तत्वों की पहचान करना जरूरी है।
पीएम मोदी ने कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवा पीढ़ी को सकारात्मक सोच और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना होगा। उन्होंने युवाओं से हिंसा और अराजकता के रास्ते से दूर रहने तथा विकास, एकता और रचनात्मक कार्यों में योगदान देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि समाज को बांटने या गलत राह पर ले जाने वाली मानसिकता के खिलाफ जागरूकता जरूरी है। देश की प्रगति के लिए युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देना और उन्हें विकास की यात्रा से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह मुद्दा भी उठाया कि लंबे समय तक माओवादी सोच रखने वाले लोग सत्ता के प्रभावशाली केंद्रों में अपनी पैठ बनाए रहे। विभिन्न सरकारी समितियों में सलाहकारों की भूमिका निभाते हुए इस विचारधारा ने देश की राष्ट्रीय नीतियों और निर्णयों को भी प्रभावित किया।
जंगलों में सशस्त्र नक्सलवाद का अंत
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार जंगलों में सक्रिय बंदूकधारी नक्सली नेटवर्क को ध्वस्त करने और देश को इस गंभीर सुरक्षा संकट से बाहर निकालने में सफल रही है। अग्रिम मोर्चों पर की गई सख्त कार्रवाइयों के कारण हथियारबंद नक्सलियों की ताकत अब लगभग खत्म हो चुकी है।
सशस्त्र विद्रोह के कमजोर पड़ने के बावजूद प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि 'वैचारिक या दिमागी नक्सली' अब भी मौजूद हैं। ऐसी मानसिकता वाले तत्व लगातार मौके की तलाश में रहते हैं और समाज में असंतोष, अशांति तथा हिंसा का माहौल बनाने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाते हैं।
पहचान, अलगाव और युवाओं की मुख्यधारा में भागीदारी
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से समाज को भ्रमित करने वाले इन 'वैचारिक नक्सलियों' की समय रहते पहचान करने और उन्हें पूरी तरह अलग-थलग करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि देश की युवा शक्ति को ऐसे बहकावों से बचाकर 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय संकल्प और मुख्यधारा के विकास प्रयासों से जोड़ना जरूरी है।
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