शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार पर बोले बंगाल के मंत्री, जांच में दोषी मिले तो कुलपति भी नहीं बचेंगे

HIGHLIGHTS
- बंगाल सरकार ने उच्च शिक्षा में कथित भ्रष्टाचार की जांच का दायरा बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
- मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कुलपतियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई।
- सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त और राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर करने का दावा किया है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा सरकार ने पिछली टीएमसी सरकार के कार्यकाल में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा विश्वविद्यालयों के कुलपतियों तक भी पहुंच सकता है।
मंत्री ने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता राज्य में ऐसी शिक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जो भ्रष्टाचार मुक्त और राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर हो। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र में राजनीतिक प्रभाव के कारण व्यवस्था प्रभावित हुई है।
कुलपतियों पर कार्रवाई के संकेत
एक साक्षात्कार में जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि राज्य में पहले शिक्षा विभाग से जुड़े एक पूर्व मंत्री को जेल जाना पड़ा है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि जांच में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई संभव है।
हालांकि मंत्री ने किसी विश्वविद्यालय या कुलपति का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को उच्च शिक्षा संस्थानों में चल रही कथित अनियमितताओं की जांच को आगे बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
भर्ती घोटालों की पृष्ठभूमि में बयान
मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई मामलों को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। इनमें स्कूल भर्ती घोटाला और नियुक्तियों में कथित गड़बड़ी के मामले प्रमुख हैं, जिनमें पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
भाजपा सरकार का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता बढ़ाना और राजनीतिक प्रभाव को कम करना उसकी प्राथमिकता है।
टीएमसी और वाम शासन पर लगाए आरोप
चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि बंगाल की शिक्षा व्यवस्था में राजनीतिक दखल की शुरुआत वाम मोर्चा सरकार के समय हुई थी, लेकिन टीएमसी शासन के दौरान यह और अधिक बढ़ गया।
उन्होंने दावा किया कि पिछले 15 वर्षों में योग्यता और शैक्षणिक गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा है तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है।
निजी संस्थानों की होगी समीक्षा
मंत्री ने फार्मेसी, बीएड, आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संस्थान शिक्षा के बजाय केवल डिग्री बांटने के केंद्र बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार नए निजी संस्थानों को मंजूरी देने से पहले पिछले वर्षों में खुले संस्थानों की जांच और ऑडिट कराएगी। उन्होंने बताया कि ऑडिट पूरा होने तक नए संस्थानों को अनुमति देने की प्रक्रिया पर रोक रहेगी।
कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सुधार का दावा
मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य के सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और प्रतिष्ठा को फिर से मजबूत करना है। उन्होंने छात्र राजनीति को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले परिसरों में शैक्षणिक माहौल और छात्रों की भागीदारी को मजबूत करना जरूरी है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए व्यापक स्तर पर कदम उठा रही है और आने वाले समय में व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जाएगा।





















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