सुप्रीम कोर्ट से अभिषेक बनर्जी को राहत, आंखों के इलाज के लिए 3 हफ्ते विदेश जाने की मिली अनुमति

HIGHLIGHTS
- अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
- हाईकोर्ट ने एसएसकेएम अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के सामने जांच कराने को कहा था।
- मामला 27 अप्रैल की जनसभा में कथित टिप्पणियों से जुड़ी प्राथमिकी से भी संबंधित है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी को राहत देते हुए आंखों के इलाज के लिए तीन सप्ताह के लिए विदेश जाने की अनुमति दे दी है। अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी विदेश जाकर इलाज कराने की मांग खारिज कर दी गई थी।
हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की थी?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की याचिका इस आधार पर खारिज की थी कि वह एसएसकेएम अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के सामने अपनी चिकित्सा जांच कराने के लिए तैयार नहीं थे। अदालत का कहना था कि मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही यह तय किया जा सकता है कि आंखों के इलाज के लिए उन्हें विदेश जाने की जरूरत है या नहीं।
हाईकोर्ट ने कहा था कि डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी अपनी मेडिकल स्थिति की जांच के लिए कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में गठित मेडिकल बोर्ड के सामने अगले दिन पेश होने के लिए तैयार नहीं थे।
याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि बनर्जी की ओर से मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं होने की बात को देखते हुए इस याचिका के जरिए उठाए गए मुद्दे को आगे लंबित रखने का कोई आधार नहीं है।
अदालत के अनुसार, अगर अभिषेक बनर्जी मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होते, तो विशेषज्ञों की राय के आधार पर यह जांच की जा सकती थी कि आंखों के इलाज के लिए उनका विदेश जाना वास्तव में जरूरी है या नहीं।
विदेश में इलाज की मांग पर हाईकोर्ट का क्या रुख था?
हाईकोर्ट ने पहले कहा था कि मामले की जांच जारी रहने के दौरान वह याचिकाकर्ता को विदेश जाने की अनुमति देने के पक्ष में नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि कोलकाता में आंखों के इलाज के लिए कई प्रतिष्ठित और नामी क्लिनिक उपलब्ध हैं।
किस प्राथमिकी से जुड़ा है मामला?
अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग भी की थी। यह प्राथमिकी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले 27 अप्रैल को आयोजित एक जनसभा में विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर की गई कथित टिप्पणियों से संबंधित है।
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