यूपीएससी शताब्दी समारोह में पीएम मोदी बोले- यह 100 साल की विरासत और युवाओं की आकांक्षाओं का उत्सव

HIGHLIGHTS
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को यूपीएससी के शताब्दी समारोह में शामिल हुए।
- पीएम मोदी ने 100 साल की यात्रा से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं।
- उन्होंने कहा कि समय के साथ सरकारी व्यवस्थाओं, तकनीक और सिलेबस में बदलाव आया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को यूपीएससी के शताब्दी समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल यूपीएससी के 100 वर्ष पूरे होने का जश्न नहीं है, बल्कि इसकी विरासत का उत्सव भी है। उन्होंने कहा कि यह उन लाखों युवाओं की आकांक्षाओं का भी उत्सव है, जो हर साल अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रयास करते हैं।
पीएम मोदी ने यूपीएससी की 100 साल की यात्रा का किया जिक्र
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यूपीएससी की 100 वर्षों की यात्रा के दौरान कई पीढ़ियां बदलीं। सरकारी व्यवस्थाओं, तकनीक और सिलेबस में भी बदलाव आया, लेकिन यूपीएससी पर लोगों का भरोसा आज भी कायम है। उन्होंने कहा कि यह भरोसा संस्था की बड़ी पूंजी है।
प्रधानमंत्री ने यूपीएससी की 100 साल की यात्रा से जुड़े सभी महानुभावों को नमन किया और सभी को शुभकामनाएं दीं।
शताब्दी समारोह के दौरान स्मारकीय डाक टिकट भी जारी किया गया। पीएम मोदी ने कहा कि जब वह कार्यक्रम में लगी गैलरी देख रहे थे, तो उनका ध्यान इस बात पर गया कि 1920 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस भी इसी प्रक्रिया से गुजरे थे। उन्होंने कहा कि उस समय अंग्रेजों का शासन था, लेकिन परीक्षा में संस्कृत का पेपर भी होता था और सुभाष बाबू ने संस्कृत में पेपर लिखा था।
पीएम मोदी ने सरदार पटेल को किया याद
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सरदार वल्लभ भाई पटेल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सरदार पटेल के सामने केवल देश को आजाद रखने की चुनौती नहीं थी, बल्कि देश को चलाने की जिम्मेदारी भी थी।
पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए जिस स्किल ढांचे की जरूरत थी, वह सरदार वल्लभ भाई पटेल ने दिया। उन्होंने यूपीएससी को आजाद भारत का एक प्रमुख स्तंभ बनाया और उसे सशक्त किया।
भर्ती और चयन प्रक्रिया को लेकर पीएम मोदी का सुझाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज जिन युवाओं की भर्ती हो रही है, वे विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और आगे चलकर विकसित भारत के सबसे बड़े लाभार्थी भी होंगे।
उन्होंने कहा कि दो कसौटियों को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए- पहली, देश पहले और दूसरी, नागरिक पहले। प्रधानमंत्री के अनुसार हर चयन को इन्हीं दो कसौटियों पर परखा जाना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि पब्लिक सर्विस में ऐसे युवाओं को लाने की जरूरत है, जो पब्लिक ऑफिस से नहीं बल्कि पब्लिक सर्विस से आकर्षित हों। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षा में केवल यह नहीं देखा जाना चाहिए कि उम्मीदवार कितना जानता है, बल्कि यह भी परखा जाना चाहिए कि वह युवा सिविल सेवा में क्यों आना चाहता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने वह दौर भी देखा है, जब यह माना जाता था कि सरकार ही माई-बाप है। लेकिन अब मंत्र है- नागरिक देवो भव:। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सेवा सर्वोपरि है।
पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का भारत नई कार्य-संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत है, जो गरीब लोगों की समस्याओं के साथ-साथ देश की जरूरतों को भी समझें।
स्मित मच्छार की बहादुरी का किया जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लायदुबई के विमान में हुई चाकूबाजी और विमान को हाईजैक करने की साजिश पर भी बात की। उन्होंने भारतीय पायलट स्मित मच्छार की बहादुरी की सराहना की और कहा कि उनके पराक्रम ने देश को गौरव से भर दिया है।
पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने स्मित मच्छार के माता-पिता और पत्नी से भी बातचीत की है। फ्लायदुबई की घटना के बाद प्रधानमंत्री ने स्मित मच्छार को बहादुरी के लिए सार्वजनिक रूप से भी सराहा था।
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