अरुणाचल प्रदेश में सियांग परियोजना के विरोध में हिंसा, एनएचपीसी कार्यालय और पुलिस स्टेशन में आग

HIGHLIGHTS
- बंद समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने राजमार्ग जाम कर दिया और प्रशासन की अपील के बावजूद पीछे नहीं हटे।
- मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया।
- झड़प के दौरान आठ प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं और उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया।
अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (एसयूएमपी) के विरोध में शुक्रवार रात हिंसा भड़क गई। उग्र प्रदर्शनकारियों ने एनएचपीसी कार्यालय और एक पुलिस स्टेशन को आग के हवाले कर दिया।
इस दौरान कई सरकारी प्रतिष्ठानों और पुलिस वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई। भीड़ ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग और दो स्थानीय विधायकों ओनी पन्यांग तथा निनोंग एरिंग के निजी आवासों पर भी हमला किया। प्रदर्शनकारियों ने घरों में तोड़फोड़ करने के साथ वहां रखा सामान भी उठा लिया।
पूर्वी सियांग की उपायुक्त जयंती पर्टिन ने शनिवार को बताया कि शुक्रवार सुबह पांच बजे से शाम पांच बजे तक आयोजित 12 घंटे का बंद काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा। हालांकि, बंद खत्म होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने राजमार्ग जाम कर दिया।
प्रशासन की ओर से समझाने के बावजूद प्रदर्शनकारी सड़क से नहीं हटे। इसके बाद मजिस्ट्रेट के आदेश पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। जवाब में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
इसके बाद उग्र भीड़ ने पासीघाट पुलिस स्टेशन, एनएचपीसी कार्यालय और कई पुलिस वाहनों में आग लगा दी। अधिकारियों के मुताबिक, झड़प में आठ प्रदर्शनकारियों को भी मामूली चोटें आईं। उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। शनिवार तड़के करीब चार बजे के बाद हालात नियंत्रण में आए। इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
प्रस्तावित परियोजना को लेकर स्थानीय समुदायों में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। प्रदर्शनकारी परियोजना से जुड़ी गतिविधियों को रोकने और गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को रिहा करने की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने की शांति की अपील
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए प्रदर्शनकारियों से बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि परियोजना को लेकर किसी भी तरह की चिंता या आपत्ति पर सरकार के साथ चर्चा की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसमें हिंसा करने या दूसरों को नुकसान पहुंचाने की कोई जगह नहीं है।
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