हिंदू केवल हिंदू दुकानदारों से खरीदें सामान और उन्हीं के साथ करें कारोबार: नितेश राणे

HIGHLIGHTS
- नितेश राणे ने कार्यक्रम में स्वामीजी के विचारों का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर दिया।
- मंत्री ने दावा किया कि भारत की लगभग 90 प्रतिशत आबादी हिंदू है।
- उन्होंने भारत को महादेव की भूमि बताते हुए आर्थिक लेन-देन में धार्मिक पहचान को प्राथमिकता देने की बात कही।
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने नवी मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में हिंदुओं से केवल हिंदू दुकानदारों से सामान खरीदने और हिंदुओं के साथ ही कारोबार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि खरीदारी और व्यापार के दौरान यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति हिंदू हो। राणे ने इसे हिंदू राष्ट्र को मजबूत करने से जोड़ते हुए हिंदुओं से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने यह दावा भी किया कि कुछ लोगों का लक्ष्य 2047 तक भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाना है। हालांकि, यह उनका अपना आरोप है।
नितेश राणे ने हिंदुओं से क्या अपील की?
नितेश राणे ने कहा कि हिंदुओं को हिंदू राष्ट्र को मजबूत करने के लिए एकजुट होना चाहिए। खरीदारी और कारोबार को लेकर उन्होंने कहा कि हिंदुओं को केवल हिंदुओं से सामान खरीदना चाहिए और उन्हीं के साथ व्यापार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग उनसे सामान खरीदने आएं, वे भी हिंदू होने चाहिए।
कार्यक्रम में राणे ने स्वामीजी के विचारों का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भर बनने की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, हिंदुओं को अपने आर्थिक लेन-देन में भी एकजुटता दिखानी चाहिए।
2047 तक भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने को लेकर क्या कहा?
राणे ने दावा किया कि कुछ लोगों का लक्ष्य 2047 तक भारत को इस्लामी राष्ट्र में बदलना है। उन्होंने इस कथित अभियान को 'गजवा-ए-हिंद' नाम दिया और कहा कि इसे रोकने के लिए हिंदुओं का एकजुट होना जरूरी है।
अपने भाषण में उन्होंने हिंदुओं से खरीदारी और कारोबार करते समय यह ध्यान रखने की अपील की कि सामने वाला व्यक्ति 'जय श्री राम' कहने वाला हो। भारत को महादेव की भूमि बताते हुए उन्होंने लोगों से अपने आर्थिक लेन-देन में इस भावना को प्राथमिकता देने को कहा। हालांकि, 2047 तक भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने से जुड़े अपने दावे के समर्थन में उन्होंने कोई प्रमाण नहीं बताया।
दुकानों में तोड़फोड़ की घटनाओं को लेकर राणे ने क्या दावा किया?
राणे ने अपने भाषण में दंगों और दुकानों में तोड़फोड़ की घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ घटनाओं में जब लोगों को पता चला कि कोई दुकान मुस्लिम की है, तो उन्होंने उसे नुकसान नहीं पहुंचाया और अगली दुकान की ओर बढ़ गए।
इसी संदर्भ में उन्होंने हिंदुओं से खरीदारी या कारोबार करने से पहले दुकानदार की धार्मिक पहचान सुनिश्चित करने की अपील की। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने किसी विशेष घटना, स्थान या जांच का विवरण नहीं दिया। इसलिए यह बयान राणे के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
हिंदू राष्ट्र और आत्मनिर्भरता पर क्या बोले मंत्री?
राणे ने हिंदुओं से आर्थिक रूप से एक-दूसरे का सहयोग करने की अपील की। उनके अनुसार, हिंदुओं के बीच खरीदारी और कारोबार को बढ़ावा देने से हिंदू राष्ट्र मजबूत होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की लगभग 90 प्रतिशत आबादी हिंदू है और ऐसे देश को हिंदू राष्ट्र कहने के लिए किसी प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है। आत्मनिर्भरता का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने लोगों से खरीदारी और कारोबार से जुड़े फैसलों में धार्मिक पहचान को महत्व देने की अपील की।
राणे के बयान का मुख्य संदेश क्या रहा?
नवी मुंबई में दिए गए भाषण में नितेश राणे ने हिंदुओं की एकता, आत्मनिर्भरता और धार्मिक पहचान के आधार पर व्यापार करने पर जोर दिया। उन्होंने हिंदुओं से सामान खरीदने, बेचने और कारोबार करने के दौरान सामने वाले व्यक्ति की धार्मिक पहचान को प्राथमिकता देने की अपील की।
इसके साथ ही उन्होंने 2047 तक भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने की कथित योजना का आरोप लगाते हुए इसे रोकने के लिए हिंदुओं से एकजुट होने को कहा। उनके भाषण में आर्थिक लेन-देन को धार्मिक पहचान से जोड़ने के साथ दंगों और दुकानों में तोड़फोड़ की घटनाओं को लेकर भी दावे किए गए।
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