बिहार की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां शिवचंद्र राम ने राष्ट्रीय जनता दल को झटका देते हुए अपने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। वे पार्टी के एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर कार्यरत थे।

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय जनता दल द्वारा एमएलसी पद न दिए जाने से वे काफी असंतुष्ट चल रहे थे। इसी नाराजगी के बीच उन्होंने यह कदम उठाया और पार्टी नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप भी लगाए।

पार्टी में अपने योगदान का किया उल्लेख

शिवचंद्र राम ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत इसी पार्टी से की थी और वे लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हैं। उनका दावा है कि उन्होंने लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के सामाजिक न्याय के संदेश को जनता तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने हमेशा जमीनी स्तर पर काम करते हुए वंचित और कमजोर वर्गों की आवाज उठाई है।

1990 से जुड़े होने का दावा

उन्होंने यह भी कहा कि वे 1990 से राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े हुए हैं और पार्टी के सभी दिशा-निर्देशों का ईमानदारी से पालन करते रहे हैं। साथ ही उन्होंने पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार भी जताया और कहा कि उन्हें अब तक संगठन में सम्मान मिला है।

भावुक होकर साझा की पीड़ा

शिवचंद्र राम ने भावुक होते हुए बताया कि पिछले कुछ दिनों से वे मानसिक रूप से काफी तनाव में रहे और लगातार चार रातें उन्हें नींद नहीं आई। उन्होंने कहा कि वे हमेशा एक समर्पित कार्यकर्ता की तरह पार्टी के लिए काम करते रहे, लेकिन हालिया घटनाओं से उन्हें गहरी निराशा हुई है।

‘अन्याय हुआ है’ कहकर दिया इस्तीफा

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ अन्याय हुआ है और उन्हें दिए गए आश्वासनों को पूरा नहीं किया गया। इसी कारण उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया। उनका कहना है कि अब वे खुद को इस पद पर बनाए रखना उचित नहीं समझते।

कमजोर वर्गों की आवाज दबने का आरोप

उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में कमजोर और वंचित वर्गों की अपेक्षाओं को झटका लगा है, जबकि प्रभावशाली वर्गों को प्राथमिकता मिली है। इसी असंतोष के चलते उन्होंने सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से अलग होने का निर्णय लिया है।