नई दिल्ली। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने योजना के तहत मिलने वाली रियायती दर पर उपलब्ध LPG सिलेंडरों की संख्या घटाकर अब सालाना 4 कर दी है, जबकि पहले यह सीमा 9 सिलेंडरों तक थी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच लिया गया है, जिससे गैस की वैश्विक लागत में तेज वृद्धि देखी जा रही है।
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की वास्तविक कीमत 1,600 रुपये प्रति सिलेंडर से भी अधिक हो चुकी है। इसके बावजूद घरेलू उपभोक्ताओं को यह सिलेंडर 942 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे सरकार और तेल कंपनियों पर भारी सब्सिडी का बोझ बना हुआ है।
नई व्यवस्था के तहत उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को पहले 4 सिलेंडरों पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर की अतिरिक्त सब्सिडी मिलती रहेगी, जो सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इस प्रकार शुरुआती चार सिलेंडरों की प्रभावी कीमत करीब 642 रुपये रह जाएगी।
पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, केवल उज्ज्वला उपभोक्ता ही नहीं बल्कि सामान्य ग्राहकों को भी अप्रत्यक्ष रूप से राहत मिल रही है, क्योंकि बाजार कीमत और उपभोक्ता मूल्य के बीच बड़ा अंतर सरकार वहन कर रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू LPG बिक्री पर तेल विपणन कंपनियों का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है, जो वित्त वर्ष 2025-26 तक लगभग 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इस बढ़ते वित्तीय दबाव को देखते हुए सरकार ने पहले ही 30,000 करोड़ रुपये की सहायता को मंजूरी दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और सप्लाई चेन पर असर के चलते आने वाले समय में LPG कीमतों में और उतार-चढ़ाव संभव है। ऐसे में सब्सिडी व्यवस्था को संतुलित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
हालांकि सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को रियायती दर पर स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना जारी रखना है, लेकिन सब्सिडी सीमा घटने से कुछ परिवारों के मासिक घरेलू खर्च पर असर पड़ सकता है।