पटना। बिहार की राजनीति में रविवार को कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा की अचानक मुलाकात ने नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने नीतीश कुमार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी से उनके आवास पर मुलाकात की, जिससे राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गईं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब कांग्रेस के अंदर खींचतान की खबरें पहले से ही चर्चा में हैं।

सुरेंद्र कुशवाहा की राज्यसभा वोटिंग से दूरी

बता दें कि हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान सुरेंद्र कुशवाहा ने पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया और मतदान से दूरी बनाए रखी। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए नोटिस जारी किया।

इसी सिलसिले में मनिहारी के विधायक मनोहर प्रसाद और फारबिसगंज के विधायक मनोज विश्वास भी वोटिंग से अनुपस्थित रहे। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार कांग्रेस में अंदरूनी विवाद बढ़ रहा है।

कुछ चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि तीनों विधायक अलग गुट की ओर बढ़ चुके हैं और अगर कोई और विधायक जुड़ता है, तो पार्टी के समीकरण में बड़ा बदलाव आ सकता है।

विधायक ने राजनीतिक अटकलों को किया खारिज

सुरेंद्र कुशवाहा ने इस मुलाकात को पूरी तरह क्षेत्रीय विकास और जनहित से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा,

“मैं अपने क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए मंत्री से मिला। पश्चिमी चंपारण पिछड़ा इलाका है और वहां तेजी से काम होना जरूरी है। अगर मेरे मन में कोई गलत मंशा होती, तो मैं रात में छिपकर जाता। मैंने खुलेआम दिन में जाकर मुलाकात की।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक अटकलों का उनके कदम से कोई लेना-देना नहीं है।

भविष्य के समीकरण पर सबकी नजर

हालांकि इस मुलाकात ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा ज़रूर शुरू कर दी है, सुरेंद्र कुशवाहा इसे सिर्फ जनहित और विकास कार्यों से जुड़ा कदम बता रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि यह मुलाकात केवल संयोग थी या फिर राज्य की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की तैयारी का संकेत देती है।