पटना। राजधानी के गांधी मैदान में सोमवार को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 80 आधुनिक अग्निशमन वाहनों के बेड़े और एआई आधारित फायर कंट्रोल रूम का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि बिहार अब केवल बुनियादी सुविधाओं के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से औद्योगिक प्रगति की ओर बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने देश के अन्य राज्यों में कारोबार स्थापित कर चुके उद्यमियों से अपील की कि वे अपनी जन्मभूमि बिहार लौटें और यहां निवेश कर राज्य के विकास में भागीदार बनें। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कई उद्योगपतियों ने बिहार में निवेश को लेकर रुचि दिखाई है और सरकार इसे लगातार प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि लक्ष्य है कि 20 नवंबर 2026 तक एनडीए सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर राज्य में लगभग पांच लाख करोड़ रुपये के निवेश की प्रक्रिया शुरू हो सके।

कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सुशासन स्थापित है और पुलिस को पूरी स्वतंत्रता के साथ काम करने की छूट दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और अपराध के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार जताते हुए कहा कि बिहार को 1000 जवानों की क्षमता वाला सीआईएसएफ ट्रेनिंग सेंटर मिला है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गया में विकसित हो रहे औद्योगिक कॉरिडोर के पास एक और सीआईएसएफ ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना के लिए पहल की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि आपदा को संकट में बदलने से रोकना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि राज्य में फायर सर्विस की क्षमता बढ़कर लगभग 8000 कर्मियों तक पहुंच गई है, जिससे आपात स्थितियों से निपटने में बेहतर सहायता मिलेगी।

इस अवसर पर उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके द्वारा शुरू की गई योजनाओं और व्यवस्थाओं का सकारात्मक प्रभाव आज भी दिखाई देता है, जिन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष उदयकांत मिश्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा की महानिदेशक शोभा अहोतकर तथा मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि अब किसी भी सरकारी परियोजना का इस्टीमेट एआई आधारित जांच के बिना मंजूर नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एआई के उपयोग से परियोजना लागत में 5 से 6 प्रतिशत तक की कमी आई है और इससे पारदर्शिता बढ़ी है तथा दोहराव की संभावना भी समाप्त हो रही है।