ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में मनमानी और बिना ठोस वजह आवेदन खारिज करने की शिकायतों को अब गंभीरता से लिया जाएगा। उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी पात्र आवेदक का ईडब्ल्यूएस आवेदन बिना लिखित कारण के अस्वीकृत नहीं किया जा सकेगा। प्रत्येक रिजेक्शन के पीछे स्पष्ट और ठोस आधार बताना अनिवार्य होगा।

बुधवार को समाहरणालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में अध्यक्ष ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया। बैठक में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और समाज के बुद्धिजीवी वर्ग के लोग मौजूद रहे। इस दौरान आयोग के उपाध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद और सदस्य जय कृष्ण झा भी शामिल हुए।

डॉ. सिंह ने कहा कि आयोग को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कई मामलों में पात्र आवेदकों के ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बिना किसी स्पष्ट कारण के खारिज कर दिए जाते हैं। इससे जरूरतमंद परिवार सरकारी योजनाओं, शिक्षा और आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण लाभों से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि हाल में अंचल स्तर पर अस्वीकृत किए गए 48 आवेदनों की फाइलों की विस्तृत जांच कर कारणों की रिपोर्ट आयोग को भेजी जाए।

आंकड़ों से सामने आई हकीकत

वरीय उप समाहर्ता ने बैठक में जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक कुल 6270 ईडब्ल्यूएस आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 6222 आवेदनों का निपटारा किया जा चुका है, जबकि 48 आवेदन अंचल स्तर पर अस्वीकृत किए गए। आयोग अध्यक्ष ने इन सभी अस्वीकृत मामलों की अलग से समीक्षा कराने के आदेश दिए हैं।

इसके साथ ही प्रमंडलीय आयुक्त को निर्देशित किया गया है कि तिरहुत प्रमंडल के सभी अंचलों से ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र से जुड़े स्वीकृत, अस्वीकृत और लंबित आवेदनों की विस्तृत सूची एक महीने के भीतर आयोग को उपलब्ध कराई जाए।

ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की वैधता बढ़ाने पर मंथन

बैठक में यह सुझाव भी रखा गया कि ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की वैधता अवधि को वर्तमान एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष किया जाए। आयोग अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को महत्वपूर्ण बताते हुए इसे सरकार के समक्ष रखने का आश्वासन दिया।

बैठक में रखे गए प्रमुख सुझाव

  • ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की वैधता तीन वर्ष की जाए

  • निजी स्कूलों में आरटीई के तहत ईडब्ल्यूएस वर्ग के बच्चों को भी आरक्षण मिले

  • केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालयों में ईडब्ल्यूएस के लिए नामांकन सीटें आरक्षित हों

  • ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के नियम और मापदंड सरल किए जाएं

  • प्रतियोगी परीक्षाओं में ईडब्ल्यूएस पुरुषों की अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष और महिलाओं की 45 वर्ष निर्धारित की जाए