पटना। मकर संक्रांति के अवसर पर राष्ट्रीय जनता दल के नेता और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव की ओर से आयोजित दही-चूड़ा भोज इन दिनों सुर्खियों में है। यह कार्यक्रम केवल पारंपरिक भोज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

मंच पर गाना रुकवाते दिखे तेजप्रताप
भोज के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था, जिसमें एक महिला गायिका मंच पर प्रस्तुति दे रही थी। इसी बीच तेजप्रताप यादव मंच के पास पहुंचे और गाना बंद करने को कहा। वायरल वीडियो में वह यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि इस तरह के गीत कार्यक्रम की मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने गायिका को धार्मिक भजन गाने की सलाह दी।

“यहां ऐसे गीत नहीं चलेंगे”
वीडियो में तेजप्रताप यादव यह भी कहते नजर आते हैं कि केवल एक विशेष वर्ग से जुड़े गीत गाने उचित नहीं हैं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े भजन प्रस्तुत करने पर जोर दिया और कहा कि धार्मिक आयोजन में अश्लील या आपत्तिजनक गीतों की जगह नहीं होनी चाहिए। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।

लालू प्रसाद की मौजूदगी से बढ़ी सियासी हलचल
इस दही-चूड़ा भोज में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की उपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी। लंबे समय बाद पिता-पुत्र को एक ही सार्वजनिक मंच पर साथ देखा गया, जिससे दोनों के बीच संबंधों को लेकर नए कयास लगाए जाने लगे हैं।

कार्यक्रम से पहले दिया गया था निमंत्रण
जानकारी के अनुसार, आयोजन से एक दिन पहले तेजप्रताप यादव राबड़ी आवास पहुंचे थे और वहां लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को कार्यक्रम का न्योता दिया था। उस मुलाकात में परिवार के अन्य सदस्य और कुछ नेता भी मौजूद थे, जिसे राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

तेजस्वी की गैरमौजूदगी भी चर्चा में
हालांकि कार्यक्रम में कुछ वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने ध्यान खींचा, लेकिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इसमें शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति को लेकर भी राजनीतिक हलकों में अलग-अलग अटकलें लगाई जा रही हैं।

कुल मिलाकर, तेजप्रताप यादव का दही-चूड़ा भोज परंपरा, वायरल वीडियो और पारिवारिक समीकरणों के चलते बिहार की राजनीति में एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।